जम्मू-कश्मीर में अनुचित बल प्रयोग का आरोप झेल रही सीआरपीएफ ने घाटी के युवाओं को छर्रे (पेलेट गन) से पहुंचे जख्मों के लिए अफसोस जताया है। इसने कहा है कि यह ‘सबसे कम नुकसान पहुंचाने वाला’ हथियार है जिसका इस्तेमाल सिर्फ अब सिर्फ अत्यंत बुरी परिस्थितियों में किया जाएगा।
एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के महानिदेशक के दुर्गा प्रसाद ने कहा कि कोई भी हथियार ‘गैर-घातक’ नहीं होता है। उन्होंने कहा कि पेलेट गन का इस्तेमाल अक्सर कश्मीर घाटी में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है और यह सुरक्षा बल के पास उपलब्ध यह सबसे कम घातक विकल्प है।
प्रसाद ने कहा कि सीआरपीएफ के सभी जवान घाटी में तैनात हैं। यहां पर तकरीबन 114 कंपनियां और 11 हजार से ज्यादा सीआरपीएफ कर्मी तैनात है। इन्हें बीच ट्रेनिंग में से लाकर यहां तैनात किया गया है। उन्होंने कहा, 'लगातार तैनाती से हमारी सालाना ट्रेनिंग को नुकसान हुआ है। आज हमारी सभी ट्रेनिंग कंपनियां कश्मीर में हैं। दूसरे राज्यों की ट्रेनिंग कंपनियों को भी बुलाया गया है।'