पांच हजार रुपये रिश्वत लेते विजिलेंस के द्वारा रंगेहाथ गिरफ्तार जीपी फंड की महिला अधिकारी शमा बख्शी (शास्त्री नगर) को भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज की अदालत ने एक साल की सजा सुनाई है। अदालत ने सजा के अलावा 50 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।
विजिलेंस आर्गनाइजेशन के अनुसार स्वर्णा देवी ने विजिलेंस को शिकायत की कि जीपी फंड आफिस गंग्याल में असिस्टेंट कम्पायलर के रूप में तैनात आरोपी शमा बख्शी ने उसके पत्नी के लंबित जीपी फंड को पास करने के लिए पांच हजार रुपये रिश्वत मांगी है।
शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने की बजाय विजिलेंस को शिकायत की। एसएसपी विजिलेंस ने लिखित शिकायत प्राप्त करने के बाद 23 अक्तूबर 2008 को एक ट्रैप टीम बनाई। महिला अधिकारी ने ज्यों ही रिश्वत की राशि ली, ट्रैप टीम ने उन्हें रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। विजिलेंस ने जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ पीसी एक्ट और आरपीसी की धारा 161 के तहत चालान पेश किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज संजय धर ने पाया कि रिकार्ड में स्पष्ट है कि महिला का केस जीपी फंड कार्यालय गंग्याल में 10 सितंबर, 2007 को लंबित मामले की शिकायत प्राप्त हुई। लगभग एक साल बाद 23 सितंबर, 2009 को विजिलेंस ने ट्रैप टीम बनाई।
इससे जाहिर होता है कि चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के परिवार वालों का मामला एक साल तक विभाग में लटका रहा, जो कि पहले ही क्लीयर हो जाना चाहिए था। इससे अपराध और गंभीर हो जाता है। हालांकि आरोपी महिला अधिकारी के खिलाफ पूर्व में इस तरह का कोई केस दर्ज नहीं है।
महिला को इस अपराध के लिए अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ सकता है। एक महिला होने के नाते उन्हें कुछ रियायत मिलनी चाहिए। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अदालत सभी धाराओं में एक-एक साल की सजा सुनाती है।
इसके अलावा उसे पांच हजार रुपये जुर्माना अदा करना होगा। जुर्माना अदा न करने पर एक साल की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। तमाम सजाएं एक साथ चलेंगी।