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कई दिनों से सीमा पार दिख रही थी संदिग्ध हलचल

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कठुआ। भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा घुसपैठ के लिहाज से अतिसंवेदनशील है। नियंत्रण रेखा पर लगातार आतंकी घुसपैठ की घटनाओं को विफल करने के बाद अब आतंकी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय सीमा से दाखिल होने की फिराक में हैं। बिलावर के डाबी इलाके में जिस तरह से भारी मात्रा में हथियारों का जखीरा बरामद किया गया है, उससे आतंकी घुसपैठ की आशंका को बल मिला है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े हो गए हैं। खुफिया सूत्रों की मानें तो पिछले कई दिनों से आतंकियों की संदिग्ध मूवमेंट को भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास देखा गया है। इसे देखते हुए अलर्ट जारी है।
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हीरानगर सेक्टर के ठीक सामने पड़ती पाकिस्तानी पोस्टों की ओर से आतंकियों के लिए घुसपैठ करवाने पर नजर रखी जाती है। झज्जर कोटली इनकाउंटर के बाद हीरानगर और सांबा सेक्टर की सरहद से होने वाली रूटीन घुसपैठ और फिर तरनाह और बेई नाले का इस्तेमाल कर हाईवे तक पहुंचने के मामलों का खुलासा पहले ही हो चुका है। एनआईए की टीमें भी बेई और तरनाह नाले को बीते महीने ही खंगाल चुकी हैं, ताकि आतंकी कहां से भारतीय सीमा में दाखिल होते रहे हैं, इसका पता लगाया जा सके।
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि रामकोट पुलिस चौकी के अधीन पड़ते डाबी के नजदीक दियालाचक छलां मार्ग पर काली माता मंदिर के सामने सौ फुट गहरी खाई में आतंकियों के लिए हथियार छुपाकर रखे गए थे। खुफिया सूत्रों की मानें तो यह जखीरा कुछ समय पहले और अंतरराष्ट्रीय सीमा पार कर आए आतंकियों के लिए यहां रखा गया था। सीमा पार से हर बार आतंकियों के लिए हथियारों के साथ घुसपैठ कर पाना मुनासिब नहीं रहता। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर भी जांच कर रही हैं कि कहीं जल्द ही आतंकियों की घुसपैठ की कोई बड़ी साजिश तो नहीं थी।
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ट्रक से आतंकियों के लिए आ रही मदद!
दियालाचक छलां मार्ग घाटी की ओर आने और जाने वाले ट्रकों का वैकल्पिक रूट है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां इस बात को लेकर भी जांच कर रही हैं कि कहीं घाटी से आतंकियों की मदद के लिए हथियार तो नहीं भेजे गए थे। झज्जर कोटली इनकाउंटर मामले में भी आतंकियों के मददगार ट्रक मॉडयूल का खुलासा हो गया था। ऐसे में एक बार फिर ट्रक से आतंकियों के लिए आ रही मदद के नेटवर्क की जांच सुरक्षा एजेंसियों के लिए जरूरी हो गई है।

तो क्या फिर सक्रिय हो रहे आतंक के पुराने रूट
बिलावर के जिस इलाके में हथियार बरामद किए गए हैं वह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से घुसपैठ कर आने वाले आतंकियों का पुराना रूट है। तरनाह नाले का एक हिस्सा ठीक उसी खाई के नजदीक हैं जहां हथियारों को छुपाकर रखा गया था। ऐसा माना जाता है कि नब्बे के दशक के बाद से ही आतंकी हीरानगर सेक्टर या पंजाब की ओर से घुसपैठ कर तरनाह, उज्ज, बेई से कई छोटे नालों का इस्तेमाल करते रहे हैं। उज्ज की ओर से घाटी गांव की ओर बढ़ते आतंकियों को लेकर कुछ साल पहले इनकाउंटर तक हो चुका है। इसी तरह से तरनाह, बेई से दाखिल होने वाले आतंकी उधमपुर या फिर कठुआ के पहाड़ी इलाकों से होते हुए कश्मीर घाटी की ओर बढ़ जाते थे। जिला कठुआ के पहाड़ी इलाकों में संदिग्ध लगभग एक दर्जन आतंकियों के मददगार (ओजीडब्लू) की गतिविधियों पर आज तक सुरक्षा एजेंसियां नजर रख रही हैं जो ताजा मामले के बाद एक बार फिर रडार पर आ गए हैं।
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