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मानसर में लकड़ी के मचान बनाने में हुए 27 लाख के घोटाले की जांच ठंड बस्ते में

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सांबा। जिले के पर्यटक स्थल मानसर झील में मछलियों को आटा डालने के लिए पर्यटकों के लिए बनाए गए लकड़ी के टूटे मचान (जट्टी) को दुरुस्त करने हुए 27 लाख के घोटाले की जांच का मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। पर्यटन विभाग मचान के लिए हुए टेंडर और मचान बनाने में हुए गोलमाल की जांच आज तक शुरू नहीं करा सका है। इसको लेकर लोगों में रोष है।
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न्यू यंग ब्लड आर्गेनाइजेशन ने उपराज्यपाल से मांग उठाई है कि इस मामले की जांच कराई जाए। आर्गेनाइजेशन के सदस्यों ने बताया कि अगर ऐसा ही रहा तो केंद्र सरकार भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन लोगों को कैसे दे सकेगी। गत दिनों इस संबंध में विभिन्न समाचार पत्रों में भी समाचार प्रकाशित हुआ, लेकिन आज तक उक्त विभाग के किसी भी अधिकारी ने संज्ञान नहीं लिया है।
सनद रहे सरुंइसर-मानसर विकास प्राधिकरण ने पिछले साल 2019 में मानसर में लकड़ी की जट्टी नंबर एक की मरम्मत के संबंध में एक टेंडर जारी किया था, जिसकी अनुमानित लागत 35 लाख रुपये थी, लेकिन एक ठेकेदार ने उसे 27 लाख में उठाया था, लेकिन टेंडर जट्टी एक का हुआ था, जबकि ठेकेदार ने विभाग के उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से जट्टी 2 का काम करा दिया। क्योंकि जट्टी-1 का खर्चा ज्यादा था, जबकि जट्टी-दो की मात्र मरम्मत होनी थी, जिसको रंगरोगन कर लाखो रुपये का चूना लगा दिया। इस बारे में विभाग के उच्च अधिकारियों ने आश्वासन दिलाया था कि इसकी जांच की जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है। इसको लेकर अब आम लोग सड़कों पर आने के लिए विवश हो रहे हैं। उन्होंने उपराज्यपाल से इसकी जांच करने की मांग उठाई है।
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