- सैनिक काॅलोनी के चाैआदी में पुलिस ने 13,500 रुपये के जाली करंसी के साथ तीन लोग को किया गिरफ्तार
- 10 दिन पहले किराये पर लिया था कमरा, यूट्यूब से सीखा तरीका, दिल्ली समेत दूसरे शहरों से जुटाया सामान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सैनिक कॉलोनी के चौआदी में किराये के कमरे में जाली नोट तैयार करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया हैं। इनके पास से 13500 रुपये जाली नोट मिले हैं, जिनमें 100-100 के नोट हैं। कलर प्रिंटर, स्कैनर, अलग-अलग रंगों की स्याही, कागज और नोट काटने का कटिंग बोर्ड से नोट तैयार कर रहे थे। नोट बाजार में उतारने से पहले ही पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। तीनों को अदालत में पेश पर सात दिन की पुलिस रिमांड ली है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय साहनी निवासी बिहार (प्रीत नगर डिग्यिाना) राहुल अहिरवार निवासी मध्य प्रदेश निवासी (त्रिकुटानगर) और इंद्रपाल कुमार निवासी झारखंड (मार्बल मार्केट) के रूप में हुई हैं। सैनिक कॉलोनी पुलिस को जांच में पता चला है कि तीनों पिछले पांच से आठ साल से जम्मू में रहते थे। इसी दौरान उनकी आपस में दोस्ती हुई।
दो से तीन महीने पहले जाली नोट तैयार करने की योजना बनाई। इसके बाद ऐसी जगह तलाशी पुलिस को शक न हो। 10 दिन पहले ही चौआदी में कमरा किराये पर लिया। वहां नोट छापने का सामान पहुंचाया और काम शुरू किया। इसमें हाई क्वालिटी का ए-4 साइज का कागज इस्तेमाल किया था जिसकी कीमत पांच से सात सौ तक रहती है। सोमवार को पुलिस ने पुख्ता सूचना पर दबिश दी।
उस समय तीनों नोट छापने में लगे थे पुलिस ने सामान व तेजधार हथियार के साथ तीनों को गिरफ्तार किया। इस संबंध में छन्नी हिम्मत पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की। अब तीनों के मोबाइल फोन, संपर्कों और सामान खरीदने के स्रोत जांच हो रही है। इसमें अन्य लोगों की भूमिका के साथ अंतरराज्यीय नेटवर्क का एंगल भी देखा जा रहा है। हालांकि अभी तीनों पर पहले कोई आपराधिक रिकाॅर्ड नहीं मिला है।
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यूट्यूब से सीखा तरीका, कोई कारपेंटर तो कोई पंचर की दुकान पर करता है काम
पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि तीनों ने जाली नोट तैयार करने का तरीका यूट्यूब पर वीडियो देखकर सीखा। फर्जी वेब सीरीज से भी प्रेरित थे। नोट छापने के लिए दिल्ली समेत देश के दूसरे हिस्सों से प्रिंटर, स्याही, कागज और अन्य सामग्री जुटाई और फिर काम शुरू करने का फैसला लिया। पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि आरोपी में दो कारपेंटर (बढ़ई) तो एक की पंचर की दुकान है। काम के दौरान तीनों की मुलाकात होती रहती थी। कम समय से ज्यादा पैसा बनाने के लिए जाली नोट तैयार करने की योजना बनाई। शुरुआत में छोटे मूल्य के नोट तैयार किए ताकि आसानी से शक में न आएं। नोटों को बड़ी दुकानों के बजाय छोटी दुकानों पर चलाने की तैयारी थी। तैयार किए गए नोटों पर असली नोट की तरह जरूरी जानकारियां व डिजाइन है। यही वजह थी कि सामान्य तौर पर देखने या हाथ में लेने पर कोई व्यक्ति आसानी से इन्हें नकली नहीं पहचान सकता था।