जम्मू/श्रीनगर। स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग की याचिका खारिज करते हुए प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने कहा कि जज के खिलाफ अदालत दीवानी या फौजदारी किसी भी मामले की याचिका का संज्ञान नहीं ले सकती।
जज (संरक्षण) अधिनियम, 1985 की धारा 3 का हवाला देकर श्रीनगर जिला कोर्ट के प्रथम अतिरिक्त सेशन जज अजय गुप्ता ने कहा कि कानूनी प्रावधानों के दायरे में रहकर ही अदालतें काम करती हैं। अधिनियम की धारा में स्पष्ट है कि जज के खिलाफ याचिका पर अदालतें कार्रवाई नहीं कर सकतीं। शुक्रवार को इसी कानूनी व्याख्या के साथ प्रोफेसर अब्दुल गनी भट्ट की याचिका को खारिज कर दिया। याची ने स्पेेशल मोबाइल मैजिस्ट्रेट के खिलाफ अवमानना कार्रवाई करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि प्रिसाइडिंग अधिकारी ने जो भी आदेश पारित किया है, वह मामले में कार्यवाही के दौरान पारित किया गया है। धारा 3 के तहत कोर्ट को अधिकार नहीं है कि इसमें कोई कार्रवाई करें।
पूर्व विधायक और पत्रकार पर मानहानि का केस
- कोर्ट ने दोनों को समन जारी किए, कोर्ट में 9 सितंबर को पेश होने को कहा
जम्मू। कठुआ सीजेएम संदीप कौर ने पूर्व विधायक प्रेम लाल और एक स्थानीय पत्रकार अरुण त्रिसल को मानहानी का नोटिस जारी किया है। आरोप है कि इन लोगों ने गुप्ता अस्पताल एवं रिसर्च सेंटर कालीबड़ी के खिलाफ गलत तथ्यों वाली खबर को अपने न्यूज पोर्टल अलर्ट इंडिया न्यूज पर चलाया। पूर्व विधायक को यह कहते हुए बताया गया कि उक्त अस्पताल में ढांचा नहीं है। कोरोना के पीड़ितों से 45 से 50 हजार लिए जाते हैं। साथ ही अस्पताल में गुर्दों और अन्य अंगों की तस्करी होती है। कठुआ प्रशासन को चाहिए कि इसमें कार्रवाई करें।
डॉ. अदीप कुमार गुप्ता ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई। अदीप के वकील कीर्ति भूषण महाजन ने कोर्ट में कहा कि डॉ. एके गुप्ता ने 1995 में अस्पताल बनाया था। अस्पताल का एक नाम है, जहां पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सांबा, कठुआ और पंजाब के लोगों को दी जाती हैं, लेकिन उक्त लोगों ने अस्पताल के नाम को बदनाम किया है, जिससे एके गुप्ता के मान सम्मान को ठेस पहुंची है। बताया कि एक व्यक्ति अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी से जूझता हुआ पहुंचा था। जिसको बेहतर ऑक्सीजन दी गई। बाद में उन्हें जीएमसी कठुआ शिफ्ट किया गया, जिनकी मौत हो गई। पूर्व विधायक प्रेम लाल ने कहा कि वह मृतक के अंकल है। इसके बाद उन्होंने अस्पताल के खिलाफ गलत बयान न्यूज पोर्टल पर दिखाया और उक्त आरोप लगाए। जज ने दलीलें सुनने के बाद पूर्व विधायक और पत्रकार को कोर्ट में पेश होकर अपना जवाब देने को कहा है।