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आरईटी टीचरों के तबादले का फैसला बरकरार

Fri, 18 Nov 2016 01:55 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
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अदालत ने दिया फैसला - फोटो : डेमो फोटो
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मुख्य न्यायाधीश एनपाल वसंथाकुमार और न्यायाधीश ताशी रबसटन की खंडपीठ ने रहबरे तालीम टीचरों के तबादले के फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा रहबरे तालीम टीचर (आरईटी) पांच साल का कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।
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खंडपीठ ने कहा कि अधिकतर आरईटी टीचर जनरल लाइन टीचर बन गए हैं और वे सरकारी कानून के तहत पक्के मुलाजिम हैं। इन टीचरों को कानून एवं प्रावधानों के तहत तबादला पाने का हक  है।जम्मू कश्मीर सिविल सर्विस कानून 1956 के विभिन्न प्रावधानों के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए अलग से रूल तय नहीं किए जा सकते हैं।

अगर एक सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर हो सकता है तो अन्य को भी पूरा हक है कि वह ट्रांसफर हो सके। वकीलों के समूह की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने कहा कि प्रशासनिक एवं छात्रों की भलाई के लिए इन आरईटी टीचरों के तबादले पर रोक लगाई है।
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वेतन जारी करने के भी आदेश

अदालत ने दिया फैसला - फोटो : demo pics
जम्मू कश्मीर अपील रूल 1956 के तहत प्रशासन के लिए यह जिम्मेदारी बनती है कि वह इसका पालन करे। याची अन्य स्कूलों में अपनी सेवाएं देने के लिए तैयार हैं। आम सर्विस की भांति ही उनका भी तबादला किया जा सकता है।

कई ऐसे याची भी हैं, जिनका तबादला केवल इस आधार पर किया गया कि स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या कम है। अन्य स्कूलों में इन विद्यार्थियों को एडजस्ट किया गया। कुछ स्कूलों में काफी कम संख्या में विद्यार्थी थे। खंडपीठ ने कहा जिन स्कूलों मे विद्यार्थियों की संख्या कम थी और नहीं के बराबर थी, उन स्कूलों से ट्रांसफर किए गए आरईटी टीचरों की समस्या पर चीफ एजूकेशन अफसर गौैर करे।

उनकी सुविधा के अनुसार फैसला करें। दो सप्ताह में ऐसे मामलों पर गौर किया जाए। जिनका तबादला अन्य स्कूलों में किया गया, उनका वेतन जारी करने के भी आदेश दिए गए। 
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