माजलता में डिग्री कालेज की स्थापना के मामले में दायर एक अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई पर मुख्य सचिव और उच्च शिक्षा सचिव को तलब किया है।
वर्ष 2002 में समाप्त की गई एक जनहित याचिका में दिए आदेश की अवमानना करने पर उक्त याचिका दायर की गई। तत्कालीन एडवोकेट जनरल ने अदालत को आश्वासन दिया था कि मजालता में डिग्री कालेज की स्थापना के लिए सरकार ने कदम उठाए हैं।
सरकार ने चिनैनी, सुंदरबनी, कालाकोट और आसपास के क्षेत्रो के इस संबंध में दायर दावों पर गंभीरता से विचार किया है और कालेज संबंधी प्रस्तावों पर जल्द फैसला ले लिया जाएगा। वर्तमान वित्तीय वर्ष में ही इस संबंध में अंतिम फैसला ले लिया जाएगा।
हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एनपाल वसंथाकुमार और जस्टिस बंसी लाल भट की खंडपीठ ने अवमानना याचिका की ओर से पेश एडवोकेट अभिनव शर्मा और स्टेट के एएजी राकेश खजूरिया की दलीलें सुनने के बाद पाया कि कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया।
कोर्ट ने मामले को एक दिसंबर 2015 के लिए सूचीबद्ध करने के निर्देश देते हुए मुख्य सचिव और उच्च शिक्षा सचिव को स्वयं अदालत में पेश होकर जवाब देने को कहा।