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जम्मू-कश्मीरः नेताओं-अफसरों की धड़कने तेज, कोर्ट ने मार्बल मार्केट जमीन आवंटन को बताया अधिकारिक लूट

Fri, 13 Dec 2019 02:51 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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स्पेशल एंटी करप्शन कोर्ट ने रोशनी एक्ट के तहत शहर के मार्बल मार्केट में सरकारी जमीन पर निर्माण मामले की दोबारा जांच के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो के एसएसपी को नए सिरे से जांच कर जल्द से जल्द रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने एंटी करप्शन ब्यूरो की पूर्व जांच रिपोर्ट के साथ पेश किए गए दस्तावेजों को आधार बनाते हुए कहा कि तत्कालीन दो आईएएस अधिकारियों और अन्य अफसरों के साथ मिलकर की गई यह एक तरह से ग्रेट आधिकारिक लूट है।

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स्पेशल जज वाई पी बोर्न ने अधिकारियों को इस प्रकरण का सूत्रधार और राजस्व विभाग और जम्मू विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को इसकी मध्य सीढ़ी करार दिया। कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी के साथ एंटी करप्शन ब्यूरो की क्लोजर रिपोर्ट को लौटाते हुए मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि एजेंसी जांच का दायरा बढ़ाकर शहर के अन्य अतिक्रमणों का भी पता लगाए। कोर्ट के अनुसार तथ्य बता रहे हैं कि मूल्य निर्धारण कमेटी के चेयरमैन रहे तत्कालीन मंडलायुक्त ने इस तमाम प्रक्रियाओं को नजरअंदाज कर जमीन का दाम कम तय कर दिया। राजस्व विभाग ने जमीन की चारदीवारी नहीं कराई। यह सारा गड़बड़झाला नेताओं, मीडिया, पुलिस और अफसरों की मिलीभगत से किया गया। स्पेशल जज ने एंटी करप्शन ब्यूरो के एसएसपी को जेडीए अफसरों की भूमिका भी जांचने के निर्देश दिए।

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तथ्यों को नजरअंदाज कर दे दी क्लीन चिट

एसीबी की रिपोर्ट पर जज ने कहा कि सारे अफसर जानते हैं कि श्रीनगर और जम्मू शहर की सरकारी जमीन जेडीए को ट्रांसफर है। जिन लोगों के नाम जमीन की गई है, इनका राजस्व विभाग में रिकार्ड ही नहीं है। पटवारी ने एक ही हफ्ते में जमीन का सरकारी रिकार्ड तैयार कर दिया, जिसमें कई खामियां थीं। इसे डीसी ने खामियाें के बावजूद मंजूर कर लिया। इस जमीन की सुरक्षा के लिए दो पुलिस पिकेट बनाई गई थीं जिन्हें आनन फानन हटा दिया गया। यहीं नहीं, इस जमीन पर जेके प्लाजा और जेके रिजार्ट बना दिए गए। यह दोनों रिजार्ट किसके नाम पर बने यह भी स्पष्ट नहीं है।

मार्बल मार्केट जमीन मामले में जज ने तंज कसते हुए कहा कि एसीबी के पेश रिकार्ड से लगता है अधिकारियों ने अपने पदों का गलत इस्तेमाल कर इन लोगों को लाभ दे दिया। जज ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि जांच रिपोर्ट के तथ्यों को नजरअंदाज कर पूर्व मंडलायुक्त सुधांशु पांडे और सहायक आयुक्त राजिंदर सिंह को क्लीन चिट दे दी गई। अन्य दो अफसरों डीसी हृदेश कुमार और तत्कालीन पटवारी अनवर सडोत्रा को भी बचाया गया। जज ने कहा कि यह कोई बच्चे तो नहीं, जो इनको पता नहीं। इस मामले की हकीकत अनुमति नहीं देती कि इस केस को बंद किया जाए।
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नेताओं-अफसरों समेत कई रसूखदारों पर आरोप

वर्ष 2014 के इस मामले में पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक समेत कई पूर्व पुलिस अफसर और रसूखदार लोग शामिल हैं। आरोप है कि पूर्व मंत्री रमण भल्ला, सुभाष चौधरी, पूर्व विधायक ओम प्रकाश, रिटायर्ड एसपी चौधरी, डीएसपी मिर्जा, मोहन मेकिन प्रापर्टी एंकर फर्म के आवास भी इस जमीन पर बने हुए हैं।

अधिकारियों की हिस्सेदारी का पता लगाए एसीबी
एसीबी जम्मू को आदेश दिया कि जिन जेडीए अधिकारियों और कर्मियों की भी इस मामले में हिस्सेदारी हो, उनका पता लगाएं। जो जमीन कौड़ियों के भाव दी गई है, इसकी सही कीमत वसूलें। यदि ऐसा नहीं होता तो भारी जुर्माना लगाकर कीमत वसूलें। यह काम जल्द से जल्द होना चाहिए। क्योंकि पहले से ही इस मामले में देरी हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि सब कुछ जानते हुए भी जेडीए की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोई उचित कदम नहीं उठाया गया।
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