एसीबी की रिपोर्ट पर जज ने कहा कि सारे अफसर जानते हैं कि श्रीनगर और जम्मू शहर की सरकारी जमीन जेडीए को ट्रांसफर है। जिन लोगों के नाम जमीन की गई है, इनका राजस्व विभाग में रिकार्ड ही नहीं है। पटवारी ने एक ही हफ्ते में जमीन का सरकारी रिकार्ड तैयार कर दिया, जिसमें कई खामियां थीं। इसे डीसी ने खामियाें के बावजूद मंजूर कर लिया। इस जमीन की सुरक्षा के लिए दो पुलिस पिकेट बनाई गई थीं जिन्हें आनन फानन हटा दिया गया। यहीं नहीं, इस जमीन पर जेके प्लाजा और जेके रिजार्ट बना दिए गए। यह दोनों रिजार्ट किसके नाम पर बने यह भी स्पष्ट नहीं है।
मार्बल मार्केट जमीन मामले में जज ने तंज कसते हुए कहा कि एसीबी के पेश रिकार्ड से लगता है अधिकारियों ने अपने पदों का गलत इस्तेमाल कर इन लोगों को लाभ दे दिया। जज ने कहा कि यह चौंकाने वाली बात है कि जांच रिपोर्ट के तथ्यों को नजरअंदाज कर पूर्व मंडलायुक्त सुधांशु पांडे और सहायक आयुक्त राजिंदर सिंह को क्लीन चिट दे दी गई। अन्य दो अफसरों डीसी हृदेश कुमार और तत्कालीन पटवारी अनवर सडोत्रा को भी बचाया गया। जज ने कहा कि यह कोई बच्चे तो नहीं, जो इनको पता नहीं। इस मामले की हकीकत अनुमति नहीं देती कि इस केस को बंद किया जाए।
वर्ष 2014 के इस मामले में पूर्व मंत्री, पूर्व विधायक समेत कई पूर्व पुलिस अफसर और रसूखदार लोग शामिल हैं। आरोप है कि पूर्व मंत्री रमण भल्ला, सुभाष चौधरी, पूर्व विधायक ओम प्रकाश, रिटायर्ड एसपी चौधरी, डीएसपी मिर्जा, मोहन मेकिन प्रापर्टी एंकर फर्म के आवास भी इस जमीन पर बने हुए हैं।
अधिकारियों की हिस्सेदारी का पता लगाए एसीबी
एसीबी जम्मू को आदेश दिया कि जिन जेडीए अधिकारियों और कर्मियों की भी इस मामले में हिस्सेदारी हो, उनका पता लगाएं। जो जमीन कौड़ियों के भाव दी गई है, इसकी सही कीमत वसूलें। यदि ऐसा नहीं होता तो भारी जुर्माना लगाकर कीमत वसूलें। यह काम जल्द से जल्द होना चाहिए। क्योंकि पहले से ही इस मामले में देरी हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि सब कुछ जानते हुए भी जेडीए की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई। कोई उचित कदम नहीं उठाया गया।