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मसर्रत आलम की जमानत पर फैसला 25 को

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देश विरोधी गतिविधियों में गिरफ्तार मसर्रत आलम की जमानत पर बुधवार को बडगाम के सीजेएम अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान मसर्रत के वकील ने दलील दी कि मसर्रत को राजनीतिक कारणों से अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
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उसने पाकिस्तानी झंडे भी नहीं लहराए। इसके जवाब में सरकारी वकील ने भी तर्क रखे। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद जमानत पर फैसले के लिए शनिवार की तिथि मुकर्रर की।

मंगलवार को पुलिस ने अदालत में केस डायरी जमा करते हुए जमानत का विरोध किया और कहा कि मसर्रत से देश की एकता-अखंडता को खतरा है।

बुधवार को अदालत में बहस के दौरान मसर्रत आलम को पेश नहीं किया गया। चीफ प्रॉसिक्यूशन अफसर (सीपीओ) ने सीजेएम बडगाम कमलेश पंडिता के सामने अपनी दलील पेश की।
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हैदरपोरा में लहराया था पाकिस्तानी झंडा

मसर्रत के वकील शब्बीर अहमद भट ने बताया कि अदालत में दोनों पक्षों के बीच बहस हुई। तर्क दोनों की ओर से रखे गए। उसके आधार पर अदालत ने 25 अप्रैल को अंतिम फैसला सुनाने का निर्णय लिया। मसर्रत के वकील के साथ एडवोकेट बिलाल अहमद वानी, जावेद हुब्बी और मोहम्मद शफी भी थे।

ज्ञात हो कि मसर्रत के अलावा अन्य अलगाववादी नेताओं पर देशद्रोह के आरोप हैं, जिन्होंने 15 अप्रैल को हैदरपोरा इलाके में पाकिस्तान के हक में नारेबाजी करने के साथ-साथ पाकिस्तानी झंडे भी लहराए थे।

इन नेताओं में सैयद अली शाह गिलानी, पीर सैफुल्ला, अयाज अकबर भट, मेहराजुद्दीन कलवाल आदि शामिल हैं। मसर्रत की जमानत के लिए 17 अप्रैल को ही याचिका दायर कर दी गई थी। फिलहाल वह 23 अप्रैल तक पुलिस रिमांड पर है।
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