देश विरोधी गतिविधियों में गिरफ्तार मसर्रत आलम की जमानत पर बुधवार को बडगाम के सीजेएम अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान मसर्रत के वकील ने दलील दी कि मसर्रत को राजनीतिक कारणों से अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।
उसने पाकिस्तानी झंडे भी नहीं लहराए। इसके जवाब में सरकारी वकील ने भी तर्क रखे। अदालत ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद जमानत पर फैसले के लिए शनिवार की तिथि मुकर्रर की।
मंगलवार को पुलिस ने अदालत में केस डायरी जमा करते हुए जमानत का विरोध किया और कहा कि मसर्रत से देश की एकता-अखंडता को खतरा है।
बुधवार को अदालत में बहस के दौरान मसर्रत आलम को पेश नहीं किया गया। चीफ प्रॉसिक्यूशन अफसर (सीपीओ) ने सीजेएम बडगाम कमलेश पंडिता के सामने अपनी दलील पेश की।