सांबा। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सांबा स्मृति शर्मा की कोर्ट ने वर्क वीजा दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी मामले में एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले से जुड़े मुख्य घटनाक्रम पंजाब के पठानकोट में हुए हैं जो इस अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर आते हैं।
सांबा में धमकी दिए जाने के आरोप भी पुलिस जांच में साबित नहीं हो पाए हैं। सांबा की केली मंडी निवासी महिला ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि पठानकोट स्थित ‘संदीपनी फॉरेन सर्विसेज’ के संचालक सलिल महाजन व पवन ने उसे यूके का वीजा दिलाने के नाम पर 30 लाख रुपये में सौदा किया था।
उसने विभिन्न बैंक खातों में करीब 16.10 लाख रुपये ट्रांसफर किए लेकिन बदले में फर्जी ऑफर लेटर थमा दिया गया। बैंक खाता उसकी जानकारी के बिना फर्जी हस्ताक्षरों और हमशक्ल के जरिये खुलवाने तथा शिकायत करने पर धमकी देने का भी आरोप लगाया।
अदालत के निर्देश पर थाना सांबा की ओर से की गई जांच में आरोप निराधार पाए गए। जांच में सामने आया कि बैंक खाता शिकायतकर्ता की सहमति, ओटीपी व लाइव फोटो सत्यापन के बाद ही खोला गया था। वीजा प्रक्रिया पूरी न होने पर आरोपी की ने पूरी राशि लाैटा दी थी। कोर्ट ने कहा, अपराध पठानकोट में घटित हुए और वहां की पुलिस पहले ही मामले की जांच कर बंद कर चुकी है। संवाद