जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (स्कॉस्ट) जम्मू को कड़ी फटकार लगाते हुए कोविड में जान गंवाने वाले प्रोफेसर की पत्नी को पेंशन का बकाया लाभ तुरंत देने का आदेश दिया है।
अदालत ने कहा कि विश्वविद्यालय मानवीय मामलों में तकनीकी कारणों का बहाना बनाकर कर्मचारी के वैधानिक अधिकार से उसे वंचित नहीं कर सकता। मुख्य न्यायाधीश अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति रजनेश ओसवाल की पीठ ने विश्वविद्यालय की अपील को खारिज करते हुए कहा कि लॉकडाउन जैसे असाधारण हालात में प्रोफेसर से दस्तावेज पूरे कराने की उम्मीद नहीं की जा सकती थी। अदालत ने कहा कि इस मामले में न्याय और समानता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
मामला दिवंगत प्रोफेसर डी. विनोद कुमार वली से जुड़ा है जो स्कॉस्ट के कृषि संकाय के फल विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रहे थे। उन्होंने 10 मार्च 2020 को पेंशन समायोजन (कम्यूटेशन) के लिए आवेदन किया था। उनकी सेवानिवृत्ति 31 मार्च को होनी थी लेकिन 24 मार्च को देशव्यापी लॉकडाउन लग गया। इस कारण वह औपचारिकताएं पूरी नहीं कर सके और मई 2020 में कोविड संक्रमण से उनका निधन हो गया। विश्वविद्यालय ने यह कहते हुए लाभ देने से इनकार कर दिया कि प्रोफेसर ने चिकित्सकीय प्रमाणपत्र और अन्य दस्तावेज जमा नहीं किए।
अदालत ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय तकनीकी नियमों की आड़ में न्याय से नहीं बच सकता। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी कर्मचारी की मृत्यु विभागीय कार्यवाही के दौरान हो जाती है, तो उसे सभी आरोपों से मुक्त माना जाएगा। जेएनएफ