- जेल में गंभीर बीमारियों का हवाला देने पर भी अदालत ने नहीं दी जमानत
- गवाहों की सुरक्षा और मुकदमे की निष्पक्षता को खतरा बताते हुए याचिका खारिज
जम्मू। अधिवक्ता बाबर कादरी हत्याकांड में श्रीनगर के पूर्व बार एसोसिएशन अध्यक्ष मियां अब्दुल कयूम की मेडिकल जमानत याचिका जम्मू की तीसरी अतिरिक्त सत्र अदालत की याचिका खारिज कर दी। कयूम ने जेल में अपनी बिगड़ती सेहत का हवाला देते हुए मेडिकल जमानत मांगी थी। अदालत ने कहा कि उनकी बीमारियों का जेल में इलाज संभव है। जमानत देने से गवाहों की सुरक्षा और मुकदमे की निष्पक्ष जांच पर गंभीर असर पड़ सकता है।
77 वर्षीय कयूम फिलहाल जम्मू जिला जेल में बंद हैं। कयूम ने डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, एकमात्र किडनी, हृदय की अनियमित धड़कन और नवंबर 2024 में स्थायी हृदय उपकरण का प्रत्यारोपण जैसी बीमारियों का हवाला देते हुए जमानत मांगी थी। उनके वकील ने तर्क दिया कि उनकी बिगड़ती सेहत उनके जीवन के लिए गंभीर खतरा है और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा का अधिकार उन्हें उचित चिकित्सा के साथ दिया जाना चाहिए। राज्य जांच एजेंसी के विशेष अभियोजकों ने जमानत का विरोध किया। जमानत मिलने से मुकदमे और गवाहों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है, क्योंकि कयूम प्रभावशाली व्यक्ति हैं और गवाहों को डराने की क्षमता रखते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि कयूम पर आरोप है कि उन्होंने अलगाववादी समूहों के साथ साजिश रचकर अधिवक्ता बाबर कादरी की हत्या की योजना बनाई थी। आरोप गंभीर हैं और आतंकवादी गतिविधियों और हथियार अधिनियम के तहत दर्ज हैं। (जेएनएफ)