जम्मू (जेएनएफ)। जम्मू कश्मीर व लद्दाख उच्च न्यायालय की खंडपीठ में मुख्य न्यायाधीश ताशी रबस्तान और न्यायाधीश एमए चौधरी ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एसपीसीबी) को पूर्वोक्त परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों/केंद्रों (एएएक्यूएमएससी) को क्रियाशील बनाने के बारे में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अधिवक्ता राजेंद्र सिंह जम्वाल द्वारा दायर एक जनहित याचिका में बोर्ड की विशेषतौर पर वायु की गुणवत्ता जांच के लिए कोई उचित व्यवस्था न होने पर सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में बताया गया है कि सरकारी प्रयोगशाला स्तर पर प्रदूषण जांच के अभाव में अधिकांश औद्योगिक इकाइयों को नमूनों की जांच के लिए निजी प्रयोगशालाओं की मदद लेनी पड़ रही है, जो कानून का उल्लंघन है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जिसे आगे सीपीसीबी कहा जाएगा) द्वारा 5 जून 2018 के आदेश के संदर्भ में अनुपालन हलफनामा दायर किया गया है, जिसके तहत उसे पहले से मौजूद केंद्रों को चालू करने और मंजूरी के अनुसार नए गुणवत्ता परिवेशी वायु निगरानी केंद्रों की स्थापना के लिए धन जारी करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था। हलफनामे में कहा गया है कि राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम (जिसे आगे एनएएमपी कहा जाएगा) के तहत देश भर में 29 राज्यों और 6 केंद्र शासित प्रदेशों के 307 शहरों/कसबों को कवर करते हुए 703 परिवेशी वायु निगरानी स्टेशन हैं। एनएएमपी के तहत जम्मू और कश्मीर में 7 परिचालन स्टेशन हैं (जम्मू संभाग में 3 स्टेशन और कश्मीर संभाग में 2018-19 के दौरान 4 स्टेशन चालू किए गए हैं), जबकि लद्दाख संभाग में 3 स्टेशन अभी स्थापित किए जाने हैं, जिनके लिए 8,16,000 की धनराशि को 21 जनवरी 2008 को जारी किया गया है।
बताया गया कि जम्मू कश्मीर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रस्ताव के जवाब में सीपीसीबी ने 28 अगस्त 2017 को एनएएमपी के तहत 24 नए परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी स्टेशनों (जम्मू संभाग में 13 और कश्मीर संभाग में 11) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दी। सीपीसीबी को भारत सरकार से 100 प्रतिशत अनुदान सहायता प्राप्त होती है और स्वीकृत परियोजना के लिए धनराशि धन की उपलब्धता के अधीन जारी की जाएगी। 19 मार्च 2018 को एनएएमपी के तहत जम्मू में 3 स्टेशनों पर परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी के लिए संचालन और रखरखाव लागत के लिए जम्मू और कश्मीर राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को 45,28,000 रुपये जारी किए गए हैं। खंडपीठ ने पाया कि बोर्ड ने हालांकि उपरोक्त राशि के उपयोग के संबंध में कोई अनुपालन हलफनामा दायर नहीं किया है।