- अभियोजन पक्ष की विफलता पर हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी
- कहा, लापरवाही से ज्यादातर आरोपी हो जाते हैं बरी, अभियुक्तों को दोषी ठहराने के लिए अपर्याप्त हो जाते हैं साक्ष्य
जम्मू। हाईकोर्ट ने एक मामले में निचली अदालत की ओर से अभियुक्त को बरी करने के आदेश को बरकरार रखते हुए अभियोजन पक्ष की विफलता पर तल्ख टिप्पणी की है। कहा कि एनडीपीएस मामलों में जांच अक्सर अक्षम अधिकारियों को सौंपी जाती है। अभियोजन पक्ष अनिवार्य प्रावधानों का पालन न करके मामले को दोषपूर्ण बनाता है। इसी लापरवाही से ज्यादातर आरोपी बरी हो जाते हैं।
न्यायाधीश संजीव कुमार और मोहम्मद यूसुफ वानी की पीठ ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया। इस मामले में उचित नमूनाकरण, तत्काल रिपोर्ट करना और आरोपी को गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देना जैसे अनिवार्य प्रावधानों का पालन न करना अभियोजन पक्ष के मामले को कमजोर बनाता है। बता दें कि हाईकोर्ट 2013 में कठुआ में दर्ज किए गए एनडीपीएस एक्ट के एक मामले को लेकर सुनवाई कर रहा था। ट्रायल कोर्ट ने मामले में आरोपियों को बरी कर दिया था। ब्यूरो