जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने 2005 में जम्मू में दर्ज एक आतंकी साजिश और हथियार बरामदगी के मामले में सरकार की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने साफ कहा कि इस गंभीर मामले की जांच में कई खामियां हैं और सबूतों के अभाव में आरोपियों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को सही ठहराते हुए दो आरोपियों की रिहाई बरकरार रखी। यह आदेश न्यायमूर्ति सिंधु शर्मा और शहजाद अजीम की खंडपीठ ने जम्मू-कश्मीर राज्य बनाम तजिंदर सिंह एवं रविंदर सिंह के मामले में दिया। मामले के अनुसार गांधीनगर पुलिस को 24 अगस्त 2005 को सूचना मिली कि कुछ लोग खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स (केजेडएफ) जैसे आतंकी संगठन से जुड़े हैं और आईएसआई के इशारे पर युवाओं को गुमराह कर रहे हैं। इसपर सतवारी चौक पर नाका लगाकर तजिंदर सिंह और रविंदर सिंह को पकड़ा गया था। पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर हथियार छिपाने की बात स्वीकार की, जो निक्की तवी इलाके से बरामद किए गए। मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपियों को रिहाई दे दी। इसके बाद सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की। सरकार की ओर से कहा गया कि हथियार व विस्फोटक मिले हैं, जो गंभीर अपराध की पुष्टि करते हैं। इसपर बचाव पक्ष ने अदालत के सामने कई खामियां उजागर कीं। ब्यूरो