कोर्ट ने आरोपी को दी जमानत, संपत्ति विवाद में चचेरी बहन ने दर्ज कराई थी प्राथमिकी
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। पॉक्सो अधिनियम की धारा 9 (एन ) के तहत अपराध साबित करने के लिए यौन इरादे की पुष्टि होना जरूरी है। यह कहते हुए फास्ट ट्रैक कोर्ट की विशेष अदालत ने संपत्ति विवाद के एक मामले में आरोपी को 25 हजार के मुचलके पर जमानत दे दी। मामले में अगली सुनवाई 28 मार्च को है।
करण सिंह एवं अन्य बनाम केंद्र शासित प्रदेश मामले में अदालत ने यह फैसला सुनाया। आरोपी पर उसकी चचेरी बहन ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 9 (एन ) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। अदालत ने कहा कि एक चाचा, चचेरे भाइयों, भतीजी और चचेरी बहन के बीच हुई कहासुनी के दौरान इस्तेमाल की गई गालियों के आधार पर पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 9 (एन) के तहत परिभाषित यौन हमले का अपराध नहीं बनता।
एफआईआर और काउंटर एफआईआर नफरत का नतीजा
अदालत ने कहा कि आवेदक और शिकायतकर्ता आपस में करीबी रिश्तेदार हैं। संपत्ति विवाद को लेकर उनकी एक-दूसरे से गहरी दुश्मनी है। दोनों पक्षों के बीच दर्ज की गई एफआईआर और काउंटर एफआईआर इसी गहरी नफरत का संभावित नतीजा है। अधिनियम की धारा 9 (एन) और 10 के तहत जुर्म भी जोड़ा गया क्योंकि शिकायत करने वाले की बेटी घटना के समय 18 साल से कम उम्र की थी।
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आवेदक छह मार्च से हिरासत में है
मामले में याचिकाकर्ता बीते छह मार्च से हिरासत में है। मामले की जांच काफी हद तक पूरी हो चुकी है। ऐसे में अदालत ने आगे की जांच में सहयोग करने, सरकारी वकील के गवाहों को किसी भी तरह से नहीं डराने, सबूतों से छेड़छाड़ नहीं करने की शर्तें लगाते हुए आरोपी को केस की अगली सुनवाई तक जमानत दे दी।