- सर्विस बुक में 1965 के बजाय 1963 दर्ज किए जाने से पैदा हुई स्थिति
- कैट का आदेश, मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि ही मान्य
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने एक मामले में स्पष्ट किया है कि मैट्रिकुलेशन सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि ही अंतिम मानी जाएगी। कैट ने यह फैसला जम्मू-कश्मीर पुलिस में डीएसपी रहे फैयाज अहमद बांडे के मामले में सुनाया है। बांडे को गलत जन्मतिथि के आधार पर समय से दो साल पहले रिटायर कर दिया गया जबकि उन्होंने 10 साल पहले ही पुलिस विभाग को सुधार की अर्जी दी थी। विभाग ने अपनी गलती तो मानी, लेकिन सुधार नहीं किया।
फैयाज बांडे ने 2014 में विभाग को बताया था कि उनकी सर्विस बुक में जन्मतिथि 28 फरवरी 1963 दर्ज है जबकि उनके मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र में 28 अप्रैल 1965 है। उन्होंने स्कूल सर्टिफिकेट को असली बताया, क्योंकि उसी के आधार पर उन्हें नौकरी मिली थी। विभाग ने 2015 में जांच कर यह गलती स्वीकार की, लेकिन इसके बाद कोई कदम नहीं उठाया गया। अप्रैल 2023 में उन्हें गलत जन्मतिथि के आधार पर सेवानिवृत्त कर दिया गया। इस पर फैयाज ने कैट में आवेदन दायर किया। इसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट भी में याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने इस पर विभाग को आदेश दिया कि जब तक कैट अंतिम फैसला नहीं देता तब तक अधिकारी की सेवा की स्थिति यथावत रखी जाए।
कैट की श्रीनगर पीठ के न्यायिक सदस्य डीएस माहरा ने हैरानी जताई कि जब विभाग ने 2015 में ही गलती मान ली थी, तो उसे सुधारने में आठ साल क्यों लगा दिए गए। कैट ने स्पष्ट किया कि केवल विभाग की लापरवाही के कारण किसी अधिकारी को उसके सेवाकाल से पहले हटाना नियमों के खिलाफ है। ट्रिब्यूनल ने पुलिस विभाग के उन दोनों आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें जन्मतिथि संशोधन को खारिज किया गया था और समय से पहले रिटायर किया गया था। कैट ने विभाग को आदेश दिया कि वह आठ हफ्तों के भीतर याचिकाकर्ता को सही जन्मतिथि के अनुसार सेवा लाभ, बकाया वेतन और पेंशन का भुगतान करे।