- जनहित के नाम पर सेवानिवृत्त करने पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, भ्रष्टाचार मामले में अभियंता को किया बहाल
जम्मू। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने जनहित के नाम पर सरकारी कर्मचारियों की समय से पहले सेवानिवृत्ति के मामलों में सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने साफ कहा कि केवल भ्रष्टाचार के किसी मामले में प्राथमिकी दर्ज होना, किसी कर्मचारी को सेवा से बाहर करने का आधार नहीं बन सकता। कथित खराब छवि के नाम पर भी नौकरी नहीं छीनी जा सकती।
अदालत ने लोक निर्माण विभाग श्रीनगर के अभियंता अहसान उल हक खान को समय से पहले रिटायर करने के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही उनकी बहाली का आदेश दिया। अहसान के खिलाफ 2011 में भ्रष्टाचार मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। इसके बाद उन्हें निलंबित किया गया। 2015 में उन्हें बहाल कर अलग-अलग स्थानों पर तैनाती दी गई।
2016 में सरकार ने जनहित का हवाला देकर उन्हें समय से पहले सेवानिवृत्त कर दिया। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने देखा कि सरकार की स्क्रीनिंग समिति ने गंभीर लापरवाही की। समिति ने न तो अभियंता का पूरा सेवा रिकॉर्ड जांचा और न ही वार्षिक कार्य मूल्यांकन पर ध्यान दिया। समिति ने यह भी कहा कि अभियंता की छवि जनता में खराब है, लेकिन कोई ठोस दस्तावेज या रिकॉर्ड पेश नहीं कर सकी। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी की छवि का आकलन उसके सेवा रिकॉर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर ही किया जा सकता है।किसी आपराधिक मामले में नाम आना दोष सिद्धी के बराबर नहीं है। जनहित के नाम पर ऐसी कार्रवाई में ठोस आधार और पारदर्शिता जरूरी है।