-कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से मांगी गई ताजा रिपोर्ट
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख उच्च न्यायालय ने बहुचर्चित गन लाइसेंस मामले में सरकार के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को अद्यतन स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। शनिवार को मुख्य न्यायाधीश एन कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति राहुल भारती की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की।
अधिवक्ता शेख शकील अहमद, राहुल रैना और सुप्रिया चौहान की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने भारत के उप सॉलिसिटर जनरल विशाल शर्मा को (सीबीआई) को पक्षकार बनाने की मांग के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर आवेदन पर आपत्तियां दर्ज करने का निर्देश दिया। इसमें उन्होंने अपने निदेशक और पुलिस अधीक्षक, शाखा प्रमुख, सीबीआई, विशेष अपराध शाखा, चंडीगढ़ के माध्यम से सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग की थी। अधिवक्ता एसएस अहमद ने खंडपीठ का ध्यान प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) द्वारा दायर 20 दिसंबर, 2023 की नवीनतम स्थिति रिपोर्ट की ओर आकर्षित किया। इसमें प्रशासन ने प्रस्तुत किया कि 16 अक्तूबर, 2018 को सीबीआई ने मामले की एफआईआर में दो आईएएस अधिकारियों को नियमों के विपरीत गन लाइसेंस जारी करने के लिए आरोपी बनाया गया और प्रदेश सरकार ने सीबीआई के अनुरोध पर मामले को डीओपीटी को भेज दिया।
घोटाले में शामिल अधिकारियों को बचा रहा प्रशासन ः अधिवक्ता
अधिवक्ता एसएस अहमद ने तर्क दिया कि यूटी प्रशासन हथियार लाइसेंस घोटाले में शामिल आईएएस अधिकारियों को बचा रहा है। बिना किसी कानूनी औचित्य के अभियोजन फाइलों को आगे नहीं बढ़ा रहे हैं। शीर्ष अदालत की ओर से तय की गई समय-सीमा का कोई सम्मान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने 12 दिसंबर, 2023 को खंडपीठ ने निदेशक और पुलिस अधीक्षक, सीबीआई विशेष अपराध शाखा, चंडीगढ़ के माध्यम से सीबीआई को पक्षकार बनाने की मांग करने वाले नए आवेदन पर आपत्तियां दर्ज करने के लिए भारत संघ और यूटी प्रशासन को नोटिस जारी किया था, लेकिन आज तक आपत्तियां दायर नहीं की गई हैं।
इस पर भारत के उप सॉलिसिटर जनरल विशाल शर्मा ने आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा और महाधिवक्ता डीसी रैना ने वरिष्ठ एएजी एसएस नंदा के साथ खुली अदालत में कहा कि भारत संघ की ओर से जवाब दाखिल किया जाए। जेएनएफ