- अनंतनाग मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर के मामले में सरकार को फटकार
- जांच के लिए 30 दिन का दिया समय
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) ने सरकारी अस्पताल में तैनात डॉक्टर की निजी प्रैक्टिस पर बिना कोई सफाई मांगे सीधे रोक लगाने पर सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। आदेश दिया है कि डॉक्टर को सुनवाई का पूरा मौका देकर जांच की जाए और 30 दिन के भीतर कोई फैसला लिया जाए। साथ ही जब तक जांच पूरी नहीं होती तब तक डॉक्टर के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाए।
मामला अनंतनाग मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के एचओडी डॉ. यूनिस कमाल से जुड़ा है। सरकार ने 28 जुलाई को एक आदेश जारी कर पूरे जम्मू-कश्मीर में उनकी निजी प्रैक्टिस पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। डॉक्टर ने इस आदेश को कैट में चुनौती दी और कहा कि यह फैसला बिना उनका पक्ष जाने लिया गया, जिससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है। न तो उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही कोई शिकायत उनके खिलाफ दर्ज है। अस्पताल के रिकॉर्ड में उनकी उपस्थिति दर्ज है और वेतन भी नियमित रूप से जारी हुआ है। ऐसे में उन पर ड्यूटी समय में निजी प्रैक्टिस का आरोप मनगढ़ंत है।
सुनवाई के दौरान कैट की श्रीनगर पीठ ने माना कि मरीजों की सेवा में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती, लेकिन सरकारी कर्मचारी के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उसे सुनवाई का पूरा मौका देना जरूरी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस तरह का आदेश सीधे तौर पर किसी की साख और पेशेवर छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, इसलिए बिना जांच और पक्ष सुने कोई फैसला लेना न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को तय की गई है। अदालत ने आदेश की प्रति मुख्य सचिव और स्वास्थ्य सचिव को भी भेजने के निर्देश दिए हैं।