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निगम स्वतंत्र इकाई, आंतरिक सेवा नियम ही होंगे प्रभावी : हाईकोर्ट

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- सरकारी कर्मी की पदोन्नति की याचिका को उच्च न्यायालय ने किया खारिज
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- कहा - आपराधिक मामले में पूरी तरह से बरी होने तक नहीं मिलेगी पदोन्नति

अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारी की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि निगम एक स्वतंत्र इकाई है, जिसके पास अपने कामकाज के लिए नियम बनाने का पूरा अधिकार है। इसके साथ ही कोर्ट ने आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे कर्मचारी को निगम के आंतरिक नियमों के अनुसार, पूरी तरह से दोषमुक्त होने तक पदोन्नति के लिए विचार किए जाने से रोकने का फैसला सुनाया है।

राष्ट्रीय जलविद्युत पावर कॉरपोरेशन में तैनात राजेश सिंह ने साल, 2019 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में राजेश ने मांग की थी कि पिछले दस साल से उसके खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले की वजह से उसे विभागीय पदोन्नति के लिए विचार किए जाने से नहीं रोका जाना चाहिए। राजेश ने अपनी याचिका में कार्मिक मंत्रालय के नियम का हवाला भी दिया, जिसके तहत आपराधिक मामले में दो साल से ज्यादा की देरी होने पर पदोन्नति के लिए विचार किए जाने की रोक को हटाते हैं।
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याचिका पर फैसला सुनाते हुए न्यायाधीश पुनीत गुप्ता ने कहा कि कार्मिक मंत्रालय के नियम पदोन्नति से संबंधित निगम के आंतरिक सेवा नियमों पर तब तक हावी नहीं होंगे, जब तक इन नियमों को ही अदालत के समक्ष विशेष रूप से चुनौती नहीं दी जाती। न्यायालय ने आगे कहा कि पदोन्नति के दावे के संबंध में दायर याचिका में नियमों को चुनौती नहीं दी गई, इसलिए न्यायालय पदोन्नति के नियमों को समाप्त नहीं कर सकता है। इसलिए वर्तमान स्थिति में याचिकाकर्ता को पदोन्नति देने के लिए बनाए गए नियमों को बदलते हुए राहत देने इनकार कर दिया। फैसले में न्यायालय ने इस बात पर भी जोर दिया कि याचिकाकर्ता की शिकायतों का आंशिक रूप से समाधान किया गया था, क्योंकि याचिका के लंबित रहने के दौरान उसे एक बार पदोन्नति दी जा चुकी है।
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