आतंकी हमलों के दौरान शहीद होने वाले सुरक्षाबलों के जवानों के परिवार को अपेक्षाकृत कम मुआवजा मिलने के मामले में हाईकोर्ट ने रियासत के मुख्य सचिव,जीएडी के सचिव, गृह विभाग के सचिव तथा केंद्रीय गृह सचिव को नोटिस जारी किया है।
यह नोटिस चीफ जस्टिस एन पाल वसंथाकुमार तथा जस्टिस आलोक अराधे की डिवीजन बेंच ने स्वत: संज्ञान वाले पीआईएल की सुनवाई के दौरान जारी किए। नोटिस जारी करते समय कोर्ट ने कहा कि आतंकवादी गतिविधियों के दौरान जान देने वाले जवानों के परिवार को एक लाख रुपये की सहायता राशि दी जाती है।
2002 में घटना हुई। एक लाख रुपये प्रत्येक जवान के परिवार को दिए गए। योग्यता होने के बाद भी परिवार के किसी सदस्य को नौकरी देने के प्रयास नहीं किए गए। यहां तक कि परिवार वालों की ओर से मुआवजा बढ़ाने की मांग की गई, लेकिन उस पर विचार नहीं किया गया।
कोर्ट ने मुआवजे की राशि को काफी कम बताया
कोर्ट ने मुआवजे की राशि को काफी कम बताया
- फोटो : डेमो पिक
बाद में परिवार वालों की ओर से याचिका दायर किया गया, जिसमें कोर्ट ने कहा कि मुआवजा काफी कम है। सरकार को एक लाख और मुआवजा देने के निर्देश दिए गए, लेकिन इस पर भी विचार नहीं किया गया। बाद में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की गई।
तब एक फरवरी 2017 को गृह विभाग की ओर से आदेश जारी किया गया कि ज्यादा मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है। सरकार के 1990 के आदेश के अनुसार पहले मुआवजा दिया चुका है। कोर्ट ने कहा कि आदेश में कहीं नहीं कहा गया है कि जो एक लाख रुपये का भुगतान किया गया है वह जवान के परिवार के लिए पर्याप्त है या नहीं।
कोर्ट ने यह भी महसूस किया कि यदि कोई अनुकंपा आधार पर नौकरी के लिए आवेदन करता है तो उसे नौकरी दी जाएगी या फिर चार लाख रुपये अतिरिक्त का भुगतान किया जाएगा जो एक लाख रुपये के अतिरिक्त होगा।
मंगलवार को याचिका पर होगी सुनवाई
कोर्ट
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कोर्ट ने यह भी कहा कि राज्य के परमानेंट रेजीडेंट धारक जवान जो आतंकियों का शिकार हो जाते हैं, उनके परिवार को भी राज्य सरकार की ओर से सहायता नहीं दी जाती है। हाल ही यह जानकारी मिली है कि हरियाणा का एक जवान जो रियासत में तैनात था उसके मारे जाने के बाद हरियाणा सरकार न केवल उसके शव को ले गई, बल्कि उसे पूरा राजकीय सम्मान दिया और 50 लाख रुपये की सहायता राशि दी।
इसी प्रकार तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, दिल्ली, केरल, कर्नाटक सरकार की ओर से 15 से 25 लाख रुपये और उससे अधिक की राशि परिवार वालों को दी जाती है। डिवीजन बेंच ने कहा कि 2016 में 100 से ज्यादा जवानों ने ड्यूटी के दौरान जान दी है। नोटिस जारी करते हुए कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से अपने यहां के जवानों को सहायता राशि क्यों नहीं दी जाती है, जबकि अन्य राज्य सरकारें दे रही हैं। अब इस पीआईएल पर सुनवाई मंगलवार को होगी।