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शादी के बीस साल बाद मिला संतान का सुख

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जम्मू शहर के प्रमुख जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में सोलह दिन पहले भले ही एक मां अपने जिगर के टुकड़े को जन्म देकर भगवान भरोसे छोड़ गई थी, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।
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एक कोख से निकले चिराग (बेटे) को किसी दूसरे की गोद में जो जाना था। पटली मोड़ त्रोड़ (सांबा) के कमल किशोर और ज्योति गुप्ता को यह सुख मिला। इस बच्चे को गोद लेने के साथ ही बीस साल बाद उनके आंगन में भी किलकारियां गूंजेंगी।

शनिवार को पुलिस और अस्पताल प्रशासन की देखरेख में न्यायालय के आदेश पर इस दंपति को नवजात सौंप दिया गया। इसी माह के शुरू में एसएमजीएस में एक महिला ने इस बच्चे को जन्म दिया और अस्पताल में छोड़ कर फरार हो गई।
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बाबा लाल द्वार ने सुनी उनकी पुकार

नवजात को अपनाने के लिए कई हाथ आगे आए, लेकिन भगवान ने कमल की सुनी। कमल ने बताया कि उनकी ज्योति गुप्ता से 1995 में शादी हुई थी, लेकिन कोई औलाद न होने से उनका जीवन मायूस हो गया था।

पीर फकीरों के दरबार में जाकर कई मन्नते कीं, जिसमें बाबा लाल द्वार ने उनकी दिल की आवाज सुनी और आज उनकी गोद में यह लड़का है। वह चालीस दिन बाद बाबा लाल द्वार जाकर ही बच्चे का नामकरण करेंगे।

इस दौरान बच्चे को गोद में लेते हुए ज्योति की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि इस तरह अचानक उन्हें औलाद का सुख मिल जाएगा।
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'बच्चे को बड़ा आदमी बनाएंगे'

यह भगवान की ही कृपा है। वह अपने लाडले की जी-जान से परवरिश करके उसे बड़ा इंसान बनाएंगे। दंपति के साथ अन्य रिश्तेदार भी पहुंचे थे। बच्चा दंपति को सौंपने पर अस्पताल में अन्य तीमारदारों ने भी उन्हें मुबारकबाद दी।

इससे पूर्व बच्चे को अस्पताल के निको वार्ड में सोलह दिन तक पुलिस की कस्टडी और अस्पताल स्टाफ की देखरेख में रखा गया था। इतने दिन वार्ड में रहने से वह पहले ही सबका दुलारा हो गया था।

अलबत्ता बच्चे की चिकित्सा औपचारिकता पूरी करने के लिए उसे वार्ड में शाम तक रखा गया था। चौकी प्रभारी अरुण भगत ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर ही सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चा दंपति को दिया गया है।
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