उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के बीच यह पंचायत सरकार पर बोझ नहीं बनना चाहती है। ऐसे में सभी परिवार अपने राशन को सूझबूझ के साथ इस्तेमाल करेंगे। फैसला लिया गया है कि गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को छोड़कर पंचायत के सभी सदस्य एक वक्त का खाना छोड़ेंगे।
क्षेत्र के 80 फीसदी लोग खेतीबाड़ी से जुड़े हैं, ऐसे में उनका एक वक्त का राशन भी बचेगा और उन्हें सरकार से मदद की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। इस अभियान में पंचायत के दो हजार से अधिक लोग योगदान देंगे।
श्रमिक वर्ग के हित को ध्यान में रखते हुए पंचायत ने फैसला लिया है कि जो लोग फसलों की कटाई में आगे आएंगे। ऐसे लोगों को कटाई करवाने वाले परिवार मेहनताना भी देंगे, लेकिन पंचायत के अन्य सदस्य मिल-जुलकर एक-दूसरे की फसलों की कटाई और उसे समेटने का काम करेंगे।
इसका एक बड़ा मकसद यह भी है कि पंचायत ने अपने स्तर पर फैसला लेते हुए पूरी पंचायत का लॉकडाउन सुनिश्चित कर दिया है। जिसे वार्ड स्तर पर गठित युवाओं की कमेटियां अमल में लाएंगी। किसी भी बाहर के व्यक्ति को पंचायत में आने की अनुमति नहीं है और न ही पंचायत का कोई व्यक्ति फैसले के बाद बाहर जा पाएगा।
कोरोना संक्रमण रोकने के लिए पंचायत ने क्षेत्र से बड़े पैमाने पर गोमूत्र और नीम के पत्ते भी इकट्ठे किए हैं, जिसे उबालकर हर घर में छिड़काव किया जा रहा है। पंचायत की ओर से प्रशासन को मदद स्वरूप पका हुआ खाना महिला कमेटी की सदस्य उपलब्ध करवाएंगी, वहीं पांच हजार मास्क भी प्रशासन को निशुल्क उपलब्ध करवाए जाएंगे। बाहरी राज्यों के 32 लोग पंचायत में फंसे हुए हैं। उनको राशन और भोजन आदि की व्यवस्था भी पंचायत की ओर से की जा रही है।