अगर मरीज की हालत गंभीर है और वह एंबो बैग पर है तो इस ट्रॉली में मुंह की तरफ दो सुराख रखे गए हैं, जिसमें चिकित्सा कर्मी गलब्स पहनकर उस एंबो बैग को चला सकता है, जिससे मरीज की सांसें चलती रहेंगी। इसी तरह ट्रॉली के ऊपर फ्लैब लगाया गया है जिसे जरूरत पड़ने पर खोला जा सकता है।
अगर मरीज ट्रॉली के भीतर खांसता या छींकता है तो उसके संक्रमण बाहर नहीं आ पाएंगे। गंभीर मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए पैरों के पास और अन्य जगहों पर सुराख रखने के साथ उसे ऑक्सीजन सिलिंडर से भी कृत्रिम ऑक्सीजन दी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि अगर ट्रॉली का प्रशिक्षण सफल रहता है तो इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। इस प्रयास को सफल बनाने में मेडिसन विभाग के एचओडी डॉ. अनिल शर्मा, अधीक्षक डॉ. दारा सिंह आदि का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।