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Coronavirus in Jammu Kashmir: रेफर सिस्टम पर अंकुश न लगने से डॉक्टरों में बढ़ा संक्रमण, कश्मीर मॉडल को अपनाने पर जोर

Sat, 22 Aug 2020 05:16 PM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू कश्मीर में कोरोना वायरस - फोटो : अमर उजाला
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जिला स्तर से मरीजों के रेफर सिस्टम पर अंकुश न लगने के कारण शहरी अस्पतालों पर कोविड और गैर कोविड मरीजों का लोड लगातार बढ़ रहा है। मरीजों का लोड बढ़ने से चिकित्सा स्टाफ में कोरोना संक्रमण का खतरा भी बढ़ा है। शहरी अस्पतालों से ही प्रतिदिन डॉक्टरों समेत 3-4 चिकित्सा कर्मी संक्रमित हो रहे हैं। गांधीनगर जच्चा बच्चा कोविड अस्पताल में हालत यह हो गई है कि संक्रमित डॉक्टरों के लिए 10 विशेष रूम पैक हो गए हैं और कई डॉक्टरों व अन्य चिकित्सा स्टाफ को सामान्य वार्ड में रखा गया है।

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शहर के विभिन्न कोविड अस्पतालों में 20 डॉक्टरों का इलाज चल रहा है। इनमें अधिकांश डॉक्टर जूनियर और पीजी स्तर के हैं। यानी एक डॉक्टर के संक्रमित होने पर उसे करीब एक माह इलाज और आइसोलेशन में रहना पड़ रहा है, जिससे कोविड अस्पतालों में भी स्टाफ की कमी खलने लगी है। गांधीनगर जच्चा बच्चा कोविड अस्पताल में 25 संक्रमित चिकित्सा स्टाफ का इलाज चल रहा है, इसमें 13 डॉक्टर शामिल हैं। जीएमसी में वीरवार रात दो और पीजी डॉक्टर संक्रमित पाए गए।

संभाग में मेडिकल कॉलेज कठुआ और मेडिकल कॉलेज राजोरी सहित अन्य नौ जिला स्तर पर जिला अस्पताल काम कर रहे हैं। लेकिन इन क्षेत्रों से खासतौर पर प्रसव, सर्जरी आदि के मरीजों को जम्मू रेफर किया जा रहा है। जबकि जिला स्तर और मेडिकल कॉलेजों में गंभीर मरीजों की चिकित्सा देखभाल के लिए वेंटिलेटर भी उपलब्ध हैं। रेफर होने से ही संक्रमण का खतरा बढ़ रहा है। वहीं, कश्मीर में मरीजों के रेफरल नीति का सख्ती से पालन किया जा रहा है। इसमें सुपर स्पेशलिटी इलाज और अति गंभीर मरीजों को ही शहर के कोविड और गैर कोविड अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।
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कश्मीर मॉडल को अपनाने पर जोर
गांधीनगर अस्पताल प्रबंधन की ओर से स्वास्थ्य निदेशक को पत्र लिखकर लगातार संक्रमित हो रहे चिकित्सा स्टाफ और जिला स्तर से रेफर हो रहे मरीजों का हवाला देते हुए कश्मीर की तरह रेफरल नीति को अपनाने को कहा गया है। सूत्रों के अनुसार अस्पताल प्रबंधन की ओर से बताया गया है कि पिछले छह माह से यह अस्पताल कोविड अस्पताल के रूप में काम कर रहा है। यहां 90 बेड हैं, लेकिन मौजूदा 90 फीसदी पैक हैं और 10 फीसदी गायनी, सर्जरी, आर्थोपेडिक्स और पेडियाट्रिक मरीजों के लिए रखे गए हैं।

अस्पताल के कई डॉक्टर, पैरा मेडिकल स्टाफ, सफाई कर्मी संक्रमित हो चुके हैं। अस्पताल में औसतन प्रतिदिन एलएससीएस सर्जरी की जा रही है। अस्पताल में जिला स्तर के अस्पतालों से पहुंच रहे गायनी और पेडियाट्रिक मरीजों को वहीं पर देखने पर जोर दिया गया है। इस पर तत्काल कदम उठाने को कहा गया है।

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