कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर करीब 19 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे अस्थायी शिक्षकों को आंदोलन का कोई लाभ नहीं मिला है, क्योंकि 31 मार्च तक ही इन शिक्षकों का करार शिक्षा विभाग के साथ था। अब यह सारे शिक्षक स्कूलों से निकाल दिए गए हैं।
अस्थायी शिक्षकों ने कई बार कार्यकाल बढ़ाने की मांग को राज्य सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों के सामने रखा है, लेकिन किसी ने भी इनकी मांग को पूरा नहीं किया है। शिक्षकों का कहना है कि जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती है, उनका आंदोलन इसी तरह से जारी रहेगा। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे शिक्षा विभाग ने 2014 में राज्य में करीब साढ़े आठ हजार युवाओं को एक सेशन के करार पर अस्थायी शिक्षक बनाकर स्कूलों में तैनात किया था।
इनके साथ सेशन 2014-15 तक ही करार किया गया था। विंटर सेशन के स्कूलों में तैनात शिक्षकों का करार दिसंबर 2014 में खत्म हो गया था, जबकि समर जोन स्कूलों में तैनात शिक्षकों का करार 31 मार्च, 2015 तक था। अब यह सरकारी स्कूलों में अस्थायी शिक्षक के तौर पर काम नहीं कर सकेंगे। कार्यकाल बढ़ाने की मांग को लेकर ये शिक्षक 19 दिन से प्रेस क्लब के बाहर भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं।
भूख हड़ताल पर बैठे शिक्षक की तबीयत बिगड़ी
मंगलवार को भूख हड़ताल पर दोपहर के समय एक और शिक्षक की हालत बिगड़ गई और उसे जीएमसी पहुंचाया गया। इसके अलावा डाक्टरों की एक टीम जांच के लिए प्रेस क्लब पहुंची और भूख हड़ताल पर बैठे अस्थायी शिक्षकों की जांच की। एसोसिएशन के प्रधान बलविंद्र सिंह पवार ने बताया कि बेशक उनका करार शिक्षा विभाग के साथ खत्म हो गया है, लेकिन वह सभी अपना आंदोलन पहले की ही तरह जारी रखेंगे।