जम्मू संभाग के सरकारी स्कूलों में प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट हो रही है। जबकि निजी स्कूलों में इजाफा हो रहा है। जम्मू व सांबा जिले में तो सरकारी स्कूलों के मुकाबले में निजी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या कहीं ज्यादा हो चुकी है। सरकारी स्कूल खाली होते जा रहे हैं। जानकारी के बाद भी शिक्षा विभाग ने अभी तक सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए कोई योजना तैयार नहीं की है।
जम्मू जिले में हालात यह हो चुके हैं कि शिक्षा विभाग को मजबूरन स्कूलों को बंद करना पड़ रहा है। प्रत्येक वर्ष शिक्षा विभाग की तरफ से जागरूकता अभियान छेड़ा जाता है, जिसमें लोगों को अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए प्रेरित किया जाता है। लेकिन इस अभियान के सकारात्मक परिणाम नजर नहीं आए हैं। करोड़ों की राशि खर्च करने के बाद भी सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या घटती जा रही है। विद्यार्थियों की संख्या न होने के कारण जम्मू जिले में कई सरकारी स्कूलों को बंद कर दिया गया है।
दो वर्ष से सरकारी स्कूलों में कितने विद्यार्थियों ने बीच में पढ़ाई छोड़ी है, इसकी जानकारी तक शिक्षा विभाग ने अभी तक नहीं जुटाई है। तलाश योजना के तहत जम्मू कश्मीर में वर्ष 2012-13 तक स्कूल छोड़ चुके विद्यार्थियों की पहचान की गई थी। सर्वे में पूरे राज्य में 59061 बच्चे सामने आए थे। इनमें ज्यादातर बच्चे ग्रामीण इलाकों के थे। इनमें 23435 लड़के व 35626 लड़कियां थी। यह विद्यार्थी स्कूलों में पहुंचे हैं कि नहीं अभी तक शिक्षा विभाग के पास इसकी जानकारी नहीं है।