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J&K: गैस एजेंसियों के बाहर लग रहीं कतारें, बुकिंग के बाद भी नहीं मिल रहा सिलिंडर, 30% ग्राहक लौट रहे खाली हाथ

Sun, 22 Mar 2026 11:36 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू

सार

मढ़ और मिश्रीवाला के ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग के बावजूद लगभग 30% ग्राहक गैस सिलिंडर समय पर नहीं पा रहे और खाली हाथ लौट रहे हैं। एजेंसियों के कर्मचारियों की देर से पहुंच और सरकारी बुकिंग नियमों के कारण ग्रामीण उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।
 
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गैस एजेंसी पर सिलिंडर बुकिंग के लिए खड़े लोग। - फोटो : बासित जरगर
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विस्तार
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मढ़ और मिश्रीवाला के ग्रामीण क्षेत्रों में बुकिंग के बाद भी उपभोक्ताओं को समय पर घरेलू गैस सिलिंडर की नहीं मिल रहा। एजेंसियों पर पहुंचने वाले लगभग 30 प्रतिशत ग्राहकों को बिना सिलिंडर खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है।

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गैस एजेंसी पर कर्मचारी समय पर नहीं पहुंच रहे और ग्राहकों की सुबह से ही लाइन लग जाती है। इसे लेकर उपभोक्ताओं में रोष है। उपभोक्ताओं के अनुसार सुबह सात बजे से ही एजेंसी के बाहर लाइन में खड़े हो जाते हैं ताकि जल्दी सिलिंडर लेकर अपने काम पर जा सकें। यह देखने के बावजूद एजेंसी के कर्मचारी और सिलिंडर की गाड़ी सुबह 10 बजे तक नहीं पहुंचती जिसका इंतजार करना मजबूरी है।

डीलरों का कहना है कि गैस गोदामों में स्टॉक भरपूर है और गैस की कोई कमी नहीं है लेकिन सरकार की ओर से तय की गई बुकिंग नियमावली ही मुख्य समस्या बनी हुई है। गृहिणियों के किचन में सिलिंडर खाली पड़े हैं। बच्चे-बूढ़े परेशान हैं। कई लोग सरकार से मांग कर रहे हैं कि सभी क्षेत्रों चाहे शहर हो या गांव में एक समान नियम लागू किया जाए। डीलरों का कहना है कि स्टॉक उपलब्ध होने के बावजूद नियमों की वजह से ग्रामीण उपभोक्ता प्रभावित हो रहे हैं।

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सिलिंडर आपूर्ति में भेदभाव का लगाया आरोप
ग्रामीण क्षेत्रों में रसोई गैस की आपूर्ति को लेकर भेदभाव के आरोप लगने लगे हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि शहरों के मुकाबले उन्हें सिलिंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। ग्रामीण कुलवीर सिंह, नरेश चौधरी और प्रदीप ठाकुर ने बताया कि शहरी गैस एजेंसियों में 25 दिनों के भीतर सिलिंडर दिया जा रहा है। ग्रामीण वितरक एजेंसियों से जुड़े उपभोक्ताओं को 45 दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि गैस की कमी के नाम पर पहले शहरों में सप्लाई भेजी जाती है और गांवों को बाद में प्राथमिकता दी जाती है। इस कारण कई परिवारों को खाना पकाने के लिए अन्य विकल्पों का सहारा लेना पड़ रहा है।
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