- पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने कार्रवाई के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति को दोबारा लिखा पत्र
- पर्यावरण को क्षति पहुंचाने पर लग सकता है जुर्माना
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। शहर में रियल एस्टेट कारोबारियों की नजरें बेशकीमती जमीनों पर हैं। यहां पर बिना विभागीय मंजूरी के धड़ल्ले से काॅलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। निर्माण कार्य में पर्यावरण नियमों को भी ताक पर रखा जा रहा है। इनके खिलाफ पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने संज्ञान लेकर प्रदूषण नियंत्रण समिति को पत्र लिखा था। कार्रवाई न होने पर दोबारा रिमाइंडर भेजा गया है।
पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दो माह पहले 10 बिल्डरों को पर्यावरणीय मंजूरी लिए बिना निर्माण कार्य शुरू करने का संज्ञान लिया था। कार्रवाई के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति को डिप्टी डायरेक्टर की तरफ से पत्र लिखा गया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही पत्र का जवाब दिया गया। शहर में छन्नी हिम्म्मत, त्रिकुटा नगर, गांधीनगर में भी कई परियोजनाएं निजी क्षेत्र के रियल एस्टेट डेवलपर्स संचालित कर रहे हैं। इसके साथ ही शहर के बाहरी क्षेत्रों बिश्नाह रोड, विजयपुर, बनतालाब, सैनिक काॅलोनी व चक भलवाल ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बड़ी संख्या में रियल एस्टेट कारोबारी निर्माण करा रहे हैं। इन जगहों पर पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान नहींं रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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रियल एस्टेट कारोबारियों पर लगेगा जुर्माना
पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. खुर्शीद आलम खान ने बताया कि पर्यावरणीय मंजूरी के बिना जिन 10 बिल्डरों ने निर्माण कार्य शुरू कराया है उन पर नियमों के तहत कार्रवाई के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति को लिखा गया था। अब तक इस दिशा में कार्रवाई के लिए कोई सूचना विभाग को नहीं मिली है। इस पर दोबारा रिमाइंडर लेटर लिखा जा रहा है ताकि प्रभावी कार्रवाई कराई जा सके। इस मामले में कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण समिति ही करेगी। जुर्माना कितना लगेगा यह संबंधित क्षेत्र, पर्यावरण को हो रही क्षति के आधार पर तय होता है।
पत्र मिलने की जानकारी नहीं है
प्रदूषण नियंत्रण समिति के चेयरमैन वासु यादव ने कहा कि पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से ऐसे किसी पत्र के मिलने की जानकारी नहीं है। कार्यालय में इस संदर्भ में अधिकारियों से जानकारी के बाद ही कुछ कह सकूंगा।धड़ल्ले से काॅलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। इनके निर्माण में पर्यावरण को ताक पर रखकर काम के आरोप हैं। इनके खिलाफ पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने संज्ञान लेकर प्रदूषण नियंत्रण समिति को पत्र लिखा था। कार्रवाई न होने पर दोबारा रिमाइंडर भेजा गया है।
पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने दो माह पहले 10 बिल्डरों को पर्यावरणीय मंजूरी लिए बिना निर्माण कार्य शुरू करने का संज्ञान लिया था। कार्रवाई के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति को डिप्टी डायरेक्टर की तरफ से पत्र लिखा गया लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। न ही पत्र का जवाब दिया गया। शहर में छन्नी हिम्म्मत, त्रिकुटा नगर, गांधीनगर में भी कई परियोजनाएं निजी क्षेत्र के रियल एस्टेट डेवलपर्स संचालित कर रहे हैं। इसके साथ ही शहर के बाहरी क्षेत्रों बिश्नाह रोड, विजयपुर, बनतालाब, सैनिक काॅलोनी व चक भलवाल ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें बड़ी संख्या में रियल एस्टेट कारोबारी निर्माण करा रहे हैं। इन जगहों पर पर्यावरणीय संतुलन का ध्यान नहींं रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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रियल एस्टेट कारोबारियों पर लगेगा जुर्माना
पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर डाॅ. खुर्शीद आलम खान ने बताया कि पर्यावरणीय मंजूरी के बिना जिन 10 बिल्डरों ने निर्माण कार्य शुरू कराया है उन पर नियमों के तहत कार्रवाई के लिए प्रदूषण नियंत्रण समिति को लिखा गया था। अब तक इस दिशा में कार्रवाई के लिए कोई सूचना विभाग को नहीं मिली है। इस पर दोबारा रिमाइंडर लेटर लिखा जा रहा है ताकि प्रभावी कार्रवाई कराई जा सके। इस मामले में कार्रवाई प्रदूषण नियंत्रण समिति ही करेगी। जुर्माना कितना लगेगा यह संबंधित क्षेत्र, पर्यावरण को हो रही क्षति के आधार पर तय होता है।
पत्र मिलने की जानकारी नहीं है
प्रदूषण नियंत्रण समिति के चेयरमैन वासु यादव ने कहा कि पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की तरफ से ऐसे किसी पत्र के मिलने की जानकारी नहीं है। कार्यालय में इस संदर्भ में अधिकारियों से जानकारी के बाद ही कुछ कह सकूंगा।