जम्मू। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो दिवसीय दौरे के दौरान खुद को कश्मीरियों और कश्मीरियत से जोड़ने की पूरी कोशिश की। उन्होंने कश्मीरी पंडितों के आस्था के केंद्र माता खीर भवानी के मंदिर में पूजा-अर्चना कर और हजरतबल की दरगाह में जाकर एक संदेश भी दिया। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा पर नफरत की राजनीति और देश को बांटने की नीतियां लागू करने का आरोप लगाया। भले ही उन्होंने 370 पर कुछ नहीं कहा, लेकिन कश्मीर पर हमले का जिक्र कर घाटी के लोगों को भी साधने की कोशिश की।
राहुल गांधी ने खासकर कश्मीर से अपने परिवार के संबंधों का जिक्र कर आम कश्मीरियों का विश्वास जीतने और उनके दिल दिमाग में जगह बनाने की कोशिश की। कश्मीर को अपना घर बताकर नाता जोड़ा। झेलम, कश्मीर के रीति-रिवाज और संस्कृति के बारे में जिक्र कर यह जताया कि वह कश्मीर के लोगों के काफी करीब हैं। वह उन्हें समझते हैं कश्मीर तथा कश्मीर के लोगों की चिंता करते हैं। आस्था के दोनों केंद्रों में जाकर उन्होंने हिंदू-मुस्लिम दोनों ही मतदाताओं को ये संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस किसी धर्म या जाति से कोई विभेद नहीं करती है। उसके लिए सभी एक बराबर हैं। दौरे की खास बात यह भी रही कि कहीं भी गुटबाजी नजर नहीं आई। आजाद खेमे के नेता भी कार्यक्रम में जुटे। खुद गुलाम नबी आजाद कांग्रेस कार्यालय के उद्घाटन के मौके पर उपस्थित थे।