चुनाव नतीजों के इंतजार ने सियासी दिग्गजों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। हाड़ कंपा देने वाली ठंड में भी प्रत्याशियों की पेशानी पर पसीने की बूंदें छलछला आती हैं। मतदान के सभी चरण समाप्त होने के बाद अब जोड़तोड़ तेज है। चुनाव प्रचार के दौरान एक-दूसरे के खिलाफ आग उगलने वाले नेता भी परस्पर गठबंधन की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार करने लगे हैं।
सियासी पंडितों और एग्जिट पोल के अनुमान अगर सत्य के करीब भी पहुंचते हैं तो जम्मू कश्मीर में बिना बैशाखी किसी भी दल के लिए सरकार बनाना मुश्किल होगा। जम्मू और लद्दाख में भाजपा और कश्मीर में पीडीपी के अच्छे प्रदर्शन की संभावनाओं के बीच सियासी दलों को फिर से हमसफर की तलाश है।
नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी का जनाधार कश्मीर में रहा है और दोनों दल स्वाभाविक रूप से कट्टर प्रतिद्वंदी हैं। लिहाजा, दोनों एक-दूसरे को रोकने के लिए हरसंभव कदम उठा सकते हैं।