जम्मू कश्मीर के पहले सदर-ए-रियासत एवं पूर्व सांसद डॉ. कर्ण सिंह ने कहा कि मेरे लेख पर जयराम रमेश की टिप्पणी संदर्भ से परे और भ्रामक है। उन्होंने आगे कहा, 'मेरा लेख किसी तरह से पंडित जवाहरलाल नेहरू के खिलाफ नहीं है। जब से मैंने 18 साल की उम्र में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया है तब से पंडित जी मेरे गुरु थे। मैं उन्हें हमेशा सर्वोच्च सम्मान में रखूंगा।'
कर्ण सिंह ने कहा, 'वास्तव में मैंने अपनी नवीनतम पुस्तक एन एक्जामिनेड लाइफ (2019) भी उन्हें समर्पित की है। यह लेख विशेष रूप से संपूर्ण परिग्रहण प्रक्रिया में मेरे पिता की भूमिका को समझाने के लिए निर्देशित किया गया था। जयराम मेरे पिता के बारे में कुछ भद्दे कमेंट करते हैं।
पूर्व सांसद ने कहा, 'मैं विलय के दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से पहले और बाद की घटनाओं का अंतिम जीवित प्रत्यक्षदर्शी हूं, जिसका मैंने अपनी आत्मकथा में विस्तार से उल्लेख किया है। मुझे उम्मीद थी कि मेरे विचारों को उस भावना से लिया जाएगा जिसमें मैंने उन्हें लिखा था, बजाय इसके कि मैं भद्दी टिप्पणी का विषय बन जाऊं।'
क्या है मामला
केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू ने हाल ही में जवाहर लाल नेहरू की जम्मू-कश्मीर नीति पर सवाल उठाए थे। इसके बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डॉ. कर्ण सिंह ने एक लेख के जरिए अपने पिता एवं महाराजा हरि सिंह के योगदान के बारे बताया था। इस पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने ट्वीट कर महाराजा की उपलब्धियों पर ही सवाल उठाए थे। जयराम रमेश ने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, जिसे इतिहास में दर्ज किया जाता।