सितंबर 2014 में जम्मू एंड कश्मीर में आई बाढ़ की चपेट में आने वाले पीड़ितों को मुआवजा जल्द देने के लिए रणनीति शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पीड़ितों को 570 करोड़ रुपये मुआवजा देने के मकसद से अभी तक 125 करोड़ रुपये दिए जा चुके हैं, जबकि बाकी पैसे आनलाइन देने के लिए बाढ़ पीड़ितों का डाटा फीड किया जा रहा है।
प्राइम मिनिस्टर रिलीफ फंड से पैसे देने के लिए डीसी आफिस में तीन दिवसीय डाटा एंट्री की ट्रेनिंग दी जा रही है। नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी के मुताबिक जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ में रियासत के दो लाख लोगों के घर तबाह हुए थे। इनमें जम्मू के 20 हजार परिवार शामिल हैं।
अथॉरिटी को ज्वाइंट एडवाइजर विनय काजला और उनके एक साथी डीसी आफिस में डाटा एंट्री की ट्रेनिंग करवा रहे हैं। इसमें मढ़, मंडाल, अरनियां, ज्यौड़ियां, भलवाल, अखनूर, बिश्नाह, चौकी चौरा सहित जम्मू की 21 तहसीलों से तहसीलदार, नायब तहसीलदार और उनके कंप्यूटर आपरेटर पहुंचे हैं।
ट्रेनिंग में खासतौर पर बताया गया है कि पीड़ित के नाम पर कोई डुप्लीकेट एंट्री न हो। इसके लिए सावधानी बरतने की जरूरत है। डाटा एंट्री करने के बाद पैसे सीधा बाढ़ पीड़ित के खाते में जाएंगे। 125 करोड़ रुपये पीड़ितों को 20 से 50 हजार रुपये तक मुआवजे के रूप में दिए जा चुके हैं।
शुक्रवार को जम्मू में ट्रेनिंग का आखिरी दिन है। फिर टीम श्रीनगर के प्रशासनिक अमले को ट्रेनिंग देने के लिए रवाना होगी। इस मौके सहायक आयुक्त राजस्व शेर सिंह, नायब तहसीलदार केपी सिंह और रजनी कुमारी सहित अन्य लोग उपस्थित थे।