वसंत पंचमी के पर्व पर शहर में दिनभर वो काटा की गूंज रही। एक तरफ जहां युवाओं ने पतंगबाजी का शौक पूरा किया तो कई ने पतंग लूटने में अपने को व्यस्त रखा।
इतना ही नहीं युवाओं के शौक में डीजे की धुन पर नृत्य भी शामिल रहा। एक दोस्त थक जाता तो वह पतंग उड़ाता और बाकी डीजे की धुन पर नाचते। दिनभर मस्ती के माहौल में शहर डूबा रहा।
विभिन्न रंगों की पतंगों ने आसामान को ढक लिया। इस पर्व के माध्यम से हर बार की तरह इस बार भी जिले में लोगों ने आपसी भाईचारे और सांप्रदायिक सौहार्द्र का संदेश दिया।
शनिवार सुबह से ही युवाओं की टोलियां छतों पर चढ़ गईं, और फिर शुरू हो गया पतंगबाजी का खेल। ये काटा, वो काटा की गूंज पूरे कसबे में सुनाई देती रही।
कोई गली, मोहल्ला ऐसा नहीं था, जहां युवा टोलियां आसमान में पतंग की डोर कटने के बाद उसे पाने के लिए भागती न नजर आई हों।
दोपहर होते-होते पतंगबाजी पूरे जोर पर थी। हर किसी की छत पर युवा अपने खाने-पीने के सामान के साथ पतंग लेकर डटे नजर आ रहे थे।
एक-दूसरे को आगे निकलने के लिए ललकारते युवा ऐसा माहौल तैयार कर रहे थे, जैसे यह कोई खेल नहीं वरन कोई युद्ध चल रहा हो।
आसमान में इतने रंगों की पतंगें थीं, कि उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था, जैसे आसमान में कई रंगों के फूल उग आए हों। शाम को युवाओं ने लूटी हुई पतंगों और बची हुई पतंगों को रख लिया, ताकि अगले दिन भी इसका आनंद लिया जा सके।