भ्रष्टाचार निरोधक विशेष जज (जम्मू) संजय धर ने दो ईटीटी कालेजों के प्रबंधकों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। साथ ही दोनों प्रबंधकों को सात दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। कैलिपोर ईटीटी कालेज कठुआ के प्रमोटर और एकमात्र ट्रस्टी मुनीष सूरी तथा विवेकानंद इंस्टीट्यूट आफ एजूकेशन, ट्रेनिंग व रिसर्च (लखनपुर) के चेयरमैन सुदर्शन कुमार गुप्ता पर ईटीटी स्कैम में शामिल होने का आरोप है।
11 जुलाई को क्राइम ब्रांच ने उन्हें गिरफ्तार किया था। क्राइम ब्रांच के केस (एफआईआर नंबर 36/2013) के अनुसार जांच के दौरान पाया कि ईटीटी कालेजों के नाम पर बड़े स्तर पर घोटाले किए गए हैं। कालेजों में बिना क्लास अटेंड किए, बिना होस्टल सुविधा और बिना किसी पंजीकरण के प्रत्येक विद्यार्थी से 45 हजार से लेकर 80 हजार रुपये तक लिए गए। कालेजों ने बोर्ड के कुछ अधिकारियों के सहयोग से इस घोटाले को अंजाम दिया।
जांच में यह भी बताया कि कई ऐसे कालेजों को कोर्स चलाने की अनुमति दी गई, जिन्होंने एक भी औपचारिकता पूरी नहीं की। नियमानुसार किसी भी संस्थान को व्यापक इंस्पेक्शन और उपलब्ध सुविधाओं को देखकर ही कोर्स चलाने की अनुमति दी जाती है, लेकिन कालेजों को बिना नियमों का पालन किए अनुमित दे दी गई है। जांच में बताया गया है कि कैलोप कालेज में 651 और विवेकानंद कालेज में 483 विद्यार्थियों को बिना किसी रिकार्ड और क्लास अटेंड किए सर्टिफिकेट दिए गए।
क्राइम बांच का मानना है कि कई और कालेजों के भी नाम सामने आ सकते हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जज संजय धर ने पाया कि मामले की जांच अभी आरंभिक स्तर पर है। इस केस में वर्ष 2013 में एफआईआर दर्ज की गई, लेकिन जांच एजेंसी थोड़ा सुस्त रही। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में एजेंसी को कार्रवाई करने को कहा। नौ जुलाई 2015 को हाईकोर्ट ने याचिका की सुनवाई करते हुए मामले की जांच अन्य एंगल से करने को कहा।
इसमें कालेज प्रबंधकों द्वारा गलत तरीके से जमा की गई संपत्ति की जांच करना शामिल है। मामले के इस पहलू की जांच अभी होनी है। यदि आरोपियों को जमानत दी जाती है तो वह इस पहलू के साक्ष्यों को क्षतिग्रस्त करने का प्रयास कर सकते हैं। तमाम बातों को ध्यान मे रखते हुए अदालत ने आरोपियों की जमानत खारिज कर दी। जेएनएफ