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सेब ढुलाई मामले में पहली बार सीएम ने दी सफाई

Wed, 13 Aug 2014 11:08 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पहली बार श्रीखंड बगीचा मामले में अपना पक्ष सार्वजनिक किया है। उन्होंने बाकायदा प्रेस बयान जारी करते हुए साफ किया कि बगीचे की कृषि आय से संबंधित मुद्दा आयकर अधिकारियों के समक्ष लंबित है। आयकर अधिकारियों ने वर्ष 2009-10 में मामले का आकलन करते हुए विस्तृत पड़ताल की है।
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उसके बाद आकलन अधिकारी ने आदेश पारित किया और कृषि आय को मिलाकर घोषित आय को संशोधित रिटर्न के अनुरूप स्वीकार किया गया था। जबकि वर्ष 2008-2009 और वर्ष 2010-2011 से संबंधित मामला आयकर अधिकारियों के समक्ष अभी तक निर्णय/मूल्यांकन के लिए लंबित है।

वर्ष 2011 और 2012 के मूल्यांकन से संबंधित आनंद चौहान जो श्रीखंड बागीचे के प्रबंधक हैं, के मामले पर 25 मार्च 2014 को मूल्यांकन अधिकारी द्वारा अंतिम निर्णय लिया जा चुका है। चौहान द्वारा मूल्यांकन अधिकारी के आदेशों को सीआईटी अपील शिमला के समक्ष चुनौती दी गई है और मामला विचाराधीन है।
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मामलों को आयकर अधिकारियों द्वारा विस्तृत जांच की गई और कुछ मामलों में इसे आंशिक रूप में स्वीकार किया गया है। आयकर अधिकारियों द्वारा आज दिन तक यह नहीं कहा गया है कि आनंद चौहान ने मेरी ओर से कृषि उपज को नहीं बेचा था जबकि आयकर अधिकारियों द्वारा आयकर अधिनियम 1962 की धारा 263 के तहत जो कार्यवाही की गई है उसे उपयुक्त प्राधिकरण के समक्ष चुनौती दी गई है, इसलिए मामला विचाराधीन है।

भाजपा का मेरे खिलाफ व्यक्तिगत प्रहार करना धूमल एवं उनके परिवार का एक-सूत्रीय कार्यक्रम है, क्योंकि प्रदेश में सत्ता प्राप्त करने की अपनी राजनीतिक लक्ष्य में वह मुझे सबसे बड़ा रोड़ा मानते हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि पांच दशकों से उनके आलोचकों ने उनका राजनीतिक जीवन को छिन्न भिन्न करने के बहुत प्रयास किए हैं बावजूद इसके अपनी ईमानदार और स्वच्छ छवि को दागदार नहीं होने दिया। हर बार कोर्ट ट्रायल का सामना करते हुए पाक साफ निकले हैं और इस बार भी न्यायालय से क्लीन चिट मिलेगी।


जानबूझ कर की कार्यवाही बाधित
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि विपक्ष ने जान-बूझकर सदन की कार्यवाही को बाधित किया। यह एक सामान्य जानकारी की बात है कि न्यायालयों में लंबित मामलों पर सदन में चर्चा एवं विचार-विमर्श नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, भाजपा न्यायालय में विचाराधीन मामले पर चर्चा करने पर जोर देती रही और सदन की कार्यवाही को रोक दिया।

कांग्रेस विधायकों के पास भी पीके धूमल तथा उनके बेटों के द्वारा किए गए गलत कार्यों से संबंधित विभिन्न गंभीर मामले थे, परंतु ये सभी मामले माननीय न्यायालयों में होने की वजह से नहीं उठाए गए। भाजपा को सदन की मर्यादा एवं प्रक्रिया का सम्मान करना चाहिए। विपक्षी भाजपा के अड़ियल, असहयोगात्मक एवं अलोकतांत्रिक व्यवहार के कारण सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद कर दिया।

सदन से वाकआउट, सत्र का बहिष्कार एवं कार्यवाही में बाधा डालना भाजपा विधायक दल की आदत बन चुकी है, जो जन हित में नहीं है। भाजपा विधायकों ने 7 फ रवरी से 21 फ रवरी 2014 तक बजट सत्र के दौरान एक भी दिन सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लिया।

मानसून सत्र के दौरान भाजपा सदस्यों ने दोबारा सदन की कार्यवाही को बाधित किया और अशोभनीय नारे लगाकर सदन के वातवरण को दूषित किया। सरकार यदि आवश्यकता हुई तो सत्र को पुन: बुलाने के लिए भी तैयार है।
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