रियासत को वित्तीय पैकेज मिलने में लगातार हो रही देरी पर मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद अप्रसन्न हैं। उन्होंने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर राज्य की बेहतरी के लिए जल्द से जल्द वित्तीय पैकेज की घोषणा की उम्मीद जताई है ताकि पुनर्वास संबंधी कार्यों में तेजी आ सके।
सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने हाल ही में पत्र लिखकर कहा है कि पैकेज न मिलने की वजह से पुनर्वास कार्य ठप पड़ा हुआ है। अब कुछ ही दिनों में ठंड की शुरुआत होने वाली है। ऐसे में कश्मीर के लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
भीषण ठंड में जिंदगी गुजर बसर कर पाना मुश्किल होगा। विकास कार्य भी बाधित हैं। बाढ़ के चलते आधारभूत ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने से सब कुछ पटरी में आने में काफी वक्त लगेगा। राज्य के एक वरिष्ठ मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री के पत्र लिखने के बाद उम्मीद है कि अगले कुछ दिनों में रियासत को पैकेज की घोषणा हो सकती है। इससे आधारभूत ढांचे के विकास के साथ ही पीडि़तों की मदद भी होगी।
सार्वजनिक सभा में पैकेज न मिलने का दर्द बयां किया
रियासत में पीडीपी-भाजपा गठजोड़ की सरकार बनने के बाद से ही वित्त मंत्री डा. हसीब द्राबू लगातार दिल्ली के संपर्क में रहे। केंद्रीय वित्त मंत्री से मिलकर रियासत के लिए वित्तीय पैकेज तैयार किया।
इसमें राज्य को 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की घोषणा की उम्मीद जताई गई। शुरुआती दौर में जून में पैकेज की घोषणा की उम्मीद जताई गई थी, लेकिन तीन महीने बाद भी पुरानी ही स्थिति है।
ज्ञात हो कि मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद तथा पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी पिछले दिनों सार्वजनिक सभा में पैकेज न मिलने का दर्द बयां किया था।
भाजपा-पीडीपी में श्रेय लेने की होड़ में फंसा है मामला
पैकेज में देरी के पीछे भाजपा-पीडीपी में श्रेय लेने की होड़ को मुख्य वजह माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि पीडीपी चाहती है कि वह रियासत की जनता में यह संदेश दे कि उसकी वजह से पैकेज मिला है और वह पूर्ववर्ती नेकां-कांग्रेस सरकार से ज्यादा वित्तीय मदद लाने में सफल रही है।
उधर, भाजपा अपनी पीठ ठोंकना चाहती है। भाजपा पैकेज का श्रेय लेकर यह जताना चाहती है कि उसे रियासत की चिंता है ताकि वह यहां अपना आधार और मजबूत कर सके।
नीति आयोग जिम्मेदार : बेग
पीडीपी प्रवक्ता महबूब बेग का कहना है कि ऐसा लगता है कि योजना आयोग को खत्म कर नीति आयोग बनने से संकट उत्पन्न हुआ है। यह केवल जम्मू-कश्मीर के साथ नहीं है बल्कि सभी राज्य यह समस्या झेल रहे हैं।
ऐसा नहीं है कि पैकेज न मिलने से रियासत में कोई बड़ा काम रुका है। सड़कें बन रही हैं और आधारभूत ढांचे का निर्माण भी हो रहा है। कहा कि मुख्यमंत्री के पत्र लिखने की उन्हें जानकारी नहीं है।