कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए विश्वास बहाली की दिशा में नए सिरे से प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। मुफ्ती सरकार ने कश्मीरी पंडितों के अलग-अलग ग्रुपों के साथ मुफ्ती सरकार ने बातचीत शुरू कर दी है।
पिछले दिनों भाजपा महासचिव राम माधव की मौजूदगी में दिल्ली में कश्मीरी पंडितों के कुछ प्रतिनिधियों के साथ चर्चा में मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद ने उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी सरकार कश्मीरी पंडितों की घाटी वापसी के लिए कृत संकल्पित है।
मोदी के मिशन कश्मीर में कश्मीरी पंडितों की ससम्मान घर वापसी सर्वोच्च प्राथमिकता पर है। गठबंधन सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) में भी इसका जिक्र है कि पंडितों का घाटी में पुनर्वास सुनिश्चित कराया जाएगा। सूत्रों ने बताया कि मुफ्ती ने अलग-अलग वर्गों से उनकी समस्याओं और अपेक्षाओं पर चर्चा की।
रियासत की सरकार भी घर वापसी चाहती
मुफ्ती ने आश्वस्त किया कि केंद्र की सरकार ही नहीं, बल्कि रियासत की सरकार भी घर वापसी चाहती है। यह तभी संभव है, जब कश्मीरी पंडित इसके लिए तैयार हों। सरकार उनकी सुरक्षा तथा अन्य सुविधाओं का प्रबंध करेगी, लेकिन सबसे जरूरी है कि उनके बीच सुरक्षा तथा भरोसे की भावना जगे।
सूत्रों ने बताया कि कश्मीर पंडितों ने मांग की है कि 25 साल पहले उन्हें जिस तरह से घाटी से निकाला गया, उसकी जांच के लिए एक आयोग का गठन किया जाना चाहिए। छोटी-मोटी घटनाओं में ही जांच आयोग गठित हो जाता है, लेकिन सैकड़ों पंडितों की जान जाने के बाद भी अब तक न्याय के लिए आयोग गठित नहीं हुआ।
उन्होंने रोजगार के लिए पैकेज, उच्च शिक्षा में आरक्षण, कश्मीरी बिजनेसमैन को आर्थिक सहायता देने, हिंदू श्राइन बिल पास करने सहित अन्य कई मुद्दों पर बात की। मुफ्ती से मुलाकात करने वालों में भाजपा एमएलसी सुरिंदर अमबरदार, हब्बाकदल से प्रत्याशी रहे भाजपा नेता मोती कौल, जम्मू विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. अमिताभ मट्टू, आल इंडिया कश्मीरी समाज के विजय आइमा, डा. रोमेश रैना और कर्नल तेज टिक्कू, जम्मू कश्मीर विचार मंच के अजय भारती, संजय गंजू और मनोज भान, जम्मू कश्मीर नेशनलिस्ट मूवमेंट के केएन पंडिता, जम्मू कश्मीर स्टडी सर्किल के जवाहर कौल, कौशर समुत के एमएल मल्ला, अशोक बारी आदि शामिल रहे।
कई बार आए उतार-चढ़ाव
केंद्र में मोदी की सरकार बनने के बाद से ही घाटी में कश्मीरी पंडितों की वापसी की दिशा में तेजी से प्रयास शुरू किए गए। इधर बीच रियासत में पीडीपी-भाजपा गठबंधन की सरकार बनने के बाद घाटी में अलग टाउनशिप बनाने की केंद्र सरकार ने घोषणा की तो अलगाववादियों ने विरोध शुरू कर दिया।
विरोध देखते हुए मुफ्ती सरकार ने यू टर्न लेते हुए अलग टाउनशिप बनाने से इनकार कर दिया। बाद में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बयान दिया कि मुफ्ती सरकार टाउनशिप के लिए 50 एकड़ जमीन देने को तैयार है।
विपक्षी दलों ने मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए केंद्र तथा मुफ्ती सरकार पर हमला बोला। भाजपा ने स्पष्ट किया कि कश्मीरी पंडितों की रजामंदी तथा रायशुमारी से ही उनकी घाटी में ससम्मान वापसी होगी।