मौसम विभाग ने पांच अगस्त तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। रविवार को बालटाल मार्ग से अमरनाथ यात्रियों को पवित्र गुफा की ओर रवाना किया गया। जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर यातायात आंशिक रूप से बहाल है।
प्रदेश में पिछले चार दिन से भारी बारिश का सिलसिला जारी है। इस दौरान किसी न किसी क्षेत्र में बादल फटने की घटना सामने आ रही है। गांदरबल के सफापोरा में बादल फटने से निचले क्षेत्रों में बाढ़ आ गई। इससे सड़कें, गलियां, बाग डूब गए। कई दुकानों और घरों में पानी भर गया।
गांदरबल के ही सरबल में बादल फटने से सैलाब तेजी से नीचे आया। हालांकि, इस क्षेत्र में बस्ती न होने से कोई नुकसान नहीं हुआ है। बांदीपोरा जिले में तड़के भारी बारिश से कई स्थानों पर बाढ़ जैसे हालात बन गए। श्रीनगर-बांदीपोरा रोड समेत कई संपर्क मार्गों पर पानी भर गया। आवाजाही प्रभावित रही।
शोपियां : जिले के आखिरी गांव हीरपोरा के ऊपर जंगल क्षेत्र में देर शाम बादल फटा है। ये इलाका आबादी से दूर है। घटना के समय एक व्यक्ति घोड़े के साथ गुजर रहा था। हालांकि घायल होने की सूचना नहीं है।
कटड़ा : कटड़ा-रियासी मार्ग पर एशिया चौक से बालनी पुल तक सड़क भूस्खलन के चलते फिर बंद कर दी गई है। शिवखोड़ी और रियासी जाने वाले लोगों को कटड़ा के श्रीधर चौक और बाणगंगा मार्ग से निकाला जा रहा है। बादल छाये रहने से हेलिकॉप्टर सेवा सुबह कुछ समय के लिए ही चली।
रियासी : माहौर तहसील के ब्रांदावली में भूस्खलन में 65 वर्षीय बशीर अहमद निवासी शदोल दादनी माहौर की मौत हो गई। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उधमपुर जिले के देवाल पुल क्षेत्र में मरम्मत कर यातायात एकतरफा बहाल कर दिया गया है।
भूस्खलन व बाढ़ की आशंका
श्रीनगर मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार पांच अगस्त तक जम्मू संभाग और चार अगस्त तक कश्मीर में भारी बारिश की संभावना है। डोडा, किश्तवाड़, उधमपुर और रियासी में बादल फटने, भूस्खलन और बाढ़ का खतरा बना हुआ है। जम्मू में सुबह तेज बारिश का भी अलर्ट है।
हाउसबोट डूबने से बचाई: श्रीनगर की नगीन झील में घाट नंबर-1 पर हाउसबोट में पानी भर गया। एसडीआरएफ ने समय रहते पानी निकालकर हाउसबोट को डूबने से बचाया। घाट नंबर-1 पर यह हाउस बोट गुलाम नबी मेजर की है।
राजोरी और पुंछ : भारी बारिश से नदियों व नालों का जलस्तर बढ़ गया। पुंछ में दो घंटे की भारी बारिश से मंगनाड़ नाला उफना गया। पुंछ-मेंढर मार्ग चार घंटे बाधित रहा। बारिश में कई कनाल कृषि भूमि एवं फसल बह गई है।