जम्मू। सरकार ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायिक सेवा नियम-2009 में संशोधन किए हैं। हाईकोर्ट के परामर्श और एलजी मनोज सिन्हा की मंजूरी के बाद कानून, न्याय एवं संसदीय मामलों विभाग के सचिव अचल सेठी की ओर से नियमों को अधिसूचित कर दिया है जो सिविल जजों की पदोन्नति व नियुक्ति से संबंधित है।
हाईकोर्ट में 25 प्रतिशत पद अर्ह वकीलों और सेवारत अभ्यर्थियों से सीधी भर्ती के जरिये भरे जाएंगे। इसके लिए लिखित परीक्षा और वाइवा होगा। लिखित परीक्षा 180 अंक की होगी जिसमें दो पेपर होंगे। पहला तीन घंटे का पेपर कानून और प्रक्रिया से संबंधित होगा जिसके लिए सौ अंक निर्धारित हैं। दूसरा पेपर 80 अंक का होगा। इसमें अभ्यर्थी को 90 मिनट में दो फैसले फ्रेम करने और लिखने होंगे। एक सिविल और क्रिमिनल का होगा। दोनों 40-40 अंक के होंगे।
अभ्यर्थी का परफॉर्मेंस एसेसमेंट 80 अंक का होगी। 35 अंक पांच साल की एसीआर, 25 अंक फैसलों के लिए और 20 अंक मुकदमों की सुनवाई के बाद निपटान के लिए निर्धारित होंगे। वाइवा 20 अंक का रहेगा। अभ्यर्थी को वाइवा में शामिल होने का मौका तभी मिलेगा जब वह लिखित परीक्षा और एसेसमेंट में अलग-अलग 50 प्रतिशत और समन्वित रूप से 55 प्रतिशत अंक प्राप्त कर लेगा।
उच्च न्यायिक सेवा में अभ्यर्थियों की वरिष्ठता एक 4 पॉइंट सालाना रोस्टर के जरिये निर्धारित की जाएगी। तरक्की से मतलब सिविल जज (सीनियर डिवीजन) कैडर से है जिसे सिविल जज जूनियर और सीनियर डिवीजन दोनों मिलाकर सात वर्ष और सीनियर डिवीजन जज के तौर पर तीन वर्ष का अनुभव हो। यहां सेवारत अभ्यर्थी से आशय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख न्यायिक सेवा के ऐसे व्यक्ति से है, जिसे एडवोकेट या न्यायिक अधिकारी के रूप में सात वर्ष से अधिक का अनुभव हो।