बिलावर। स्वतंत्रता के दशकों बाद भी जिले के दूर दराज पहाड़ी इलाकों में हालात ऐसे हैं कि लोग आज भी मरीजों को कंधों और पालकी पर लेकर अस्पताल तक पहुंचाते हैं। यह स्थिति विकास के उन दावों की भी पोल खोलती है, जिसके बल पर राजनीतिक दल हर चुनावों में लोगों से बड़े-बड़े दावे करते हैं।
उपजिला बिलावर के दूरदराज इलाकों के रहने वाले लोग आज भी कई प्रकार की मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ज्यादातर पहाड़ी इलाके आज तक सड़क संपर्क से नहीं जुड़ पाए हैं। वहीं, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के चलते इलाके के लोगों को कई प्रकार की परेशानियां उठानी पड़ती हैं। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्र डुगैन, लोहाई मल्हार, मढून, धार डुगनू, मलाड, किंडली, भटौडी व अन्य कई इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण लोगों को बीमार व्यक्ति के इलाज के लिए निचले इलाकों का रुख करना पड़ता है। इसके साथ ही सड़क संपर्क न होने के कारण लोगों को मरीज को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए पालकी का सहारा लेना पड़ता है। इन इलाकों में सड़क संपर्क तो न के बराबर है ही, वहीं स्वास्थ्य संस्थान भी सुविधाओं के अभाव में शोपीस से ज्यादा कुछ नहीं हैं।
इलाके के प्रतिनिधियों ने बताया कि कई इलाकों में सरकार की ओर से प्राथमिक उपचार केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन डॉक्टरों और अस्पतालों में सुविधाओं के अभाव के कारण प्राथमिक उपचार केंद्र सिर्फ नाम के हैं, लोगों को इनका कोई लाभ नहीं मिल रहा है। लोगों ने बताया कि ज्यादातर प्राथमिक उपचार केंद्रों में डॉक्टरों की तैनाती नहीं की गई है। वहीं कई केंद्रों में तैनात डॉक्टरों को दूसरे अस्पतालों या डिस्पेंसरी में अटैच किया गया है। दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों के लोगों ने सरकार से मांग की है जिन प्राथमिक उपचार केंद्रों में डॉक्टरों की कमी है, वहां डॉक्टरों की जल्द से जल्द तैनाती की जाए। इसके साथ ही क्षेत्र के सड़क संपर्क को बेहतर किया जाए, ताकि लोगों की परेशानियों का हल हो सके।