बच्चे और किशोर कोविड संक्रमण की चपेट में आने से मिस-सी (मल्टी सिस्टम इंफ्लेमेटरी सिंड्रोम) से पीड़ित हो रहे हैं। हालांकि कुछ बच्चों और किशोरों में ऐसी असामान्य समस्या विकसित हो सकती है। इसमें हालत बिगड़ने पर बच्चे को उचित इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ता है। ये भी जरूरी नहीं है कि जिन बच्चों को मिस-सी हुआ हो उनमें कोविड-19 के लक्षण मिले हों। कुछ बच्चों में हफ्तों पहले लक्षण आ जाते हैं।
जम्मू में एसएमजीएस अस्पताल के पेडियाट्रिक विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनुज भट्टी कहते हैं कि अस्पताल में मिस सी से पीड़ित बच्चे और किशोर पहुंच रहे हैं। अगर किसी बच्चे को तीन दिन से लगातार बुखार आ रहा है। इसके अलावा बच्चा सुस्त है, उसकी आंखें लाल हो रही हैं, गर्दन में दर्द है, डायरिया की शिकायत है, बच्चा बिल्कुल ढीला हो गया है तो उसकी निकट चिकित्सा केंद्र में तुरंत जांच करवाएं।
इसके लिए सरकार ने एसएमजीएस अस्पताल में दवाएं उपलब्ध करवाई हैं। इसके अलावा प्रसव के बाद नवजात को रूटीन वैक्सीन में हेपेटाइटिस-बी पोलियो आदि प्राथमिकता पर दें। अगर मां कोविड से पीड़ित है और उसमें कोई लक्षण नहीं है तो वह डबल मास्क पहनकर नवजात को स्तनपान करवा सकती है या अपना दूध कटोरी में डालकर उसे चम्मच से नवजात को दे सकती हैं।
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