रियासत में कई संक्रमित बीमारियां अभी भी स्वास्थ्य महकमे के लिए चुनौती बनी हुई हैं। जम्मू संभाग में स्वाइन फ्लू, डेंगू, डायरिया, डिसेंट्री जैसी बीमारियां कई लोगों की जान ले चुकी हैं। इन बीमारियों को लेकर कई दावों के बावजूद समाज में पूर्ण रूप से जागरूकता का दायरा नहीं बढ़ पाया है।
जनता से जुड़े इन सवालों पर संवाददाता अमित वर्मा ने संभागीय एपिडामिनिलिजिस्ट डा. जयपाल सिंह से बात की। इस बातचीत में डा. सिंह ने बताया कि जम्मू संभाग के दस जिलों में इंटिग्रेटिड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम सेल काम कर रहे हैं।
इन सेल के माध्यम से ही 22 संक्रमित बीमारियों के खिलाफ लड़ाई जारी है। इन सेल से फीडबैक मिलने पर प्रभावित इलाकों में चिकित्सा पहुंचाई जाती है। हर हफ्ते साप्ताहिक रिपोर्ट भेजी जाती है। संक्रमित बीमारियों में जिला कठुआ, सांबा, जम्मू, उधमपुर ज्यादा प्रभावित रहा है।
पब्लिक हेल्थ लैब की जरूरत
पब्लिक हेल्थ लैब की जरूरत
- फोटो : Demp Pic.
जिला स्तर पर संक्रमित बीमारियों की तत्काल पहचान और मरीजों को उचित इलाज देने के लिए पब्लिक हेल्थ लैबोरेटरी (पीएचएल) की दरकार है। इन लैबोरेटरी में संबंधित जिलों में खुद ही टेस्ट लिए जाते हैं।
हालांकि गांधीनगर, राजोरी और उधमपुर के लिए तीन लैबोरेटरी की मंजूरी मिली है। इन अस्पतालों की लैबोरेटरी में नए उपकरण स्थापित किए जाएंगे। प्रति लैबोरेटरी को अपग्रेड करने पर करीब 17.50 लाख रुपये खर्च आएगा।
स्वाइन फ्लू के खिलाफ कमर कसी
स्वाइन फ्लू के खिलाफ कमर कसी
- फोटो : डेमो फोटो
डेंगू के बाद स्वाइन फ्लू को लेकर विभाग ने तैयारियां की हैं। इस सीजन डेंगू के 708 संदिग्ध मरीजों के सैंपल जांच के लिए भेजे गए, जिसमें 79 पाजिटिव आए। डेंगू ने आधिकारिक तौर पर एक युवक की जान भी ली। दस जिलों पर स्वाइन फ्लू के लिए नोडल अफसर की देखरेख में रेपिड रिस्पांस टीमों का गठन किया गया है।
जिला अस्पतालों में दस और कम्युनिटी हेल्थ सेंटर और उपजिला अस्पतालों में पांच बेड आइसोलेट रखे जाएंगे। सरवाल, गांधीनगर, सांबा में स्वाइन फ्लू टीम के लिए वैक्सीन (इंजेक्शन) भेज दी गई हैं, जिसके बाद अन्य जिलों में भी भेजी जा रही है।
इस सीजन में स्वाइन फ्लू के टेस्ट को जीएमसी की माइक्रोबायोलाजी लैब में करवाने की तैयारी की जा रही है। अभी तक सभी टेस्ट दूसरे राज्यों की लैबोरेटरी से करवाए जा रहे थे। स्वाइन फ्लू के मरीजों के लिए स्टोर में पर्याप्त टैमीफ्लू टैबलेट की उपलब्धता का दावा किया गया है। इसमें व्यस्क मरीज को पांच दिन के कोर्स में रोजाना 75 मिलीग्राम की दो टैबलेट दी जाती हैं।