जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के खत्म होने के बाद 28,400 करोड़ रुपये की नई औद्योगिक नीति ने देश विदेश के निवेशकों का जम्मू-कश्मीर में रुझान बढ़ाया है। अब तक 1,23,227 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों के लिए 6900 आवेदन आ चुके हैं। परंतु, निर्धारित उद्योग पैकेज के प्रावधान खत्म होने के बाद अब यूटी प्रशासन ने केंद्र से 46000 से अधिक करोड़ रुपये के पैकेज की मांग की है। यानी कुल 75000 करोड़ रुपये के पैकेज के प्रावधान को देखा जा रहा है।
प्रदेश को जो निवेश प्रस्ताव मिले हैं उनमें जम्मू संभाग में 1900 से अधिक और कश्मीर में 5000 से अधिक आवेदन हैं। नई केंद्रीय क्षेत्र योजना (एनसीएसएस) के तहत 30 सितंबर को ऑनलाइन पोर्टल को बंद किया जाना है। पोर्टल के माध्यम से किसी भी निवेश प्रस्ताव के लिए पहले निवेशक को पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण करवाना जरूरी होता है। मगर पैकेज का प्रावधान खत्म हो जाने पर जुलाई के अंत में इसे बंद करने के बाद दोबारा बहाल किया गया है।
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ऑनलाइन पंजीकरण पोर्टल को चलाता है। जम्मू-कश्मीर में केंद्रीय प्रायोजित नई औद्योगिक नीति को अप्रैल 2021 में लाया गया था। अब पंजीकरण पोर्टल के दोबारा बहाल होने पर निवेश प्रस्तावों के लिए आवेदन आ रहे हैं।
बजट विस्तार बना चुनौती
निर्धारित पैकेज खत्म होने से बजट का विस्तार चुनौती बना हुआ है। इसके लिए यूटी प्रशासन ने पुराने और नए पैकेज के लिए 75000 हजार करोड़ रुपये तक की मांग की है। अब तक जम्मू संभाग में 81000 करोड़ से अधिक और कश्मीर में 41000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव आ चुके हैं। इन प्रस्तावों में जम्मू संभाग में 217760 और कश्मीर में 251785 के साथ कुल 469545 रोजगार सृजन का प्रस्ताव दिया गया है।
निवेशकों ने दोनों संभाग में 68860 कनाल जमीन मांगी
निवेशकों ने जम्मू संभाग में 39484 कनाल और कश्मीर संभाग में 29375 कनाल के साथ कुल 68860 कनाल भूमि की मांग की है। वर्ष 2021 से अब तक 8050 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। 18185 करोड़ रुपये निवेश प्रस्ताव के सथ 46857 लोगों को रोजगार देने का वादा करने वाली लगभग 889 इकाइयों का जमीनी कार्य शुरू होने का दावा किया गया है।