केंद्र सरकार ने राज्यों की नौकरियों में इंटरव्यू खत्म करने में राज्य सरकारों की सुस्ती को गंभीरता से लिया है। केंद्र ने स्पष्ट किया है कि पिछले दरवाजे से भर्तियों को बढ़ावा देने के लिए कुछ राज्य सरकारें इस मामले की अनदेखी कर रहीं हैं।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डा. जितेन्द्र सिंह ने जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती समेत देश के सभी मुख्यमंत्रियों को डीओ लेटर जारी कर इस संदर्भ में तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नान गजटेड और जूनियर पदों के इंटरव्यू समाप्त करने के लिए केंद्र ने राज्य सरकारों को एक साल में चार पत्र लिखे हैं।
इसके बावजूद कुछ राज्यों ने इस बाबत कोई कदम नहीं उठाया है। जम्मू कश्मीर सरकार ने इंटरव्यू खत्म करने के बजाए कई नियुक्तियों के लिए इंटरव्यू के अंक बढ़ा दिए हैं। केंद्र ने इससे नियुक्तियों में भ्रष्टाचार बढ़ने की आशंका जताई है।
DOPT ने मांगा है कार्रवाई का ब्योरा
JITENDRA SINGH
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पीएमओ राज्य मंत्री डा. सिंह ने डिपार्टमेंट आफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के प्रभारी मंत्री के रूप में राज्यों से इंटरव्यू खत्म करने पर अब तक की गई कार्रवाई के बारे में ब्योरा तलब किया है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, गुजरात, छत्तीसगढ़ और असम ने इंटरव्यू खत्म कर अच्छी पहल की है।
इस मामले में पिछड़े जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, और त्रिपुरा जैसे राज्यों को भी इसका अनुकरण करना चाहिए। डा. सिंह ने कहा कि इंटरव्यू समाप्त करने में ढ़िलाई यह बताती है कि संबंधित राज्यों में मेरिट में नहीं आने वाले प्रतियोगियों को इंटरव्यू में गलत तरीके से अधिक नंबर देकर नौकरी देने की प्रथा चल रही है। ऐसे राज्यों में इंटरव्यू में अधिक अंक देकर गलत तरीके से नियुक्तियों के आरोप लगते रहे हैं।
राष्ट्रपति ने की थी सराहना
राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 15 अगस्त 2015 को लाल किले से संबोधन में नौकरियों में इटंरव्यू समाप्त करने की बात कही थी। बाद में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए 31 जनवरी 2017 को इस कदम की सराहना की।
प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद केंद्र के कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग ने इस बाबत कदम उठाते हुए केंद्र के नान गजटेड, जूनियर पदों और सी एंड डी ग्रुप के पदों के लिए इंटरव्यू समाप्त कर दिया। जिन पदों के लिए विशेष स्किल की जरुरत है, वहां स्किल टेस्ट की छूट दी गई है।
राज्यों को सामान्य प्रशासन विभाग के सचिवों के साथ लगातार बैठकों के बावजूद कुछ राज्य इस मामले में अब तक उदासीन बने हुए हैं। डा. सिंह ने कहा, जूनियर पदों पर इंटरव्यू समाप्त करना राज्य और युवाओं के हित में है। इससे भर्तियों में पारदर्शिता बढ़ेगी।