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नए जम्मू-कश्मीर में सीबीआई ने भ्रष्टाचारियों पर कसा शिकंजा, 13 महीनों में दर्ज किए 18 मामले

Fri, 29 Jan 2021 11:27 AM IST
प्रशांत कुमार अजय मीनिया, जम्मू
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सीबीआई - फोटो : ani
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केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में भ्रष्टाचार और घोटालों के कई मामलों की जांच में रफ्तार आई है। खासकर प्रदेश में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की भूमिका काफी बढ़ गई है। केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले सीबीआई के पास इक्का-दुक्का मामले ही जांच के लिए पहुंचते थे, लेकिन पिछले 13 महीनों में सीबीआई ने 18 मामले दर्ज कर जांच शुरू की है।

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इसमें मुख्य रूप से सबसे बड़ा मामला लाखों कनाल जमीन का रोशनी घोटाला शामिल है। कई बड़ी मछलियों पर सीबीआई ने हाथ डाला है और कई बड़ी मछलियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में लॉकडाउन रहने और कोरोना महामारी की बंदिशों के बावजूद सीबीआई ने 16 केस दर्ज किए। जबकि इस साल पहले महीने में ही दो केस दर्ज हो चुके हैं।

2020 में रोशनी घोटाला, पूर्व वित्त मंत्री अब्दुल रहीम राथर के बेटे हिलाल राथर के बैंक लोन घोटाले, पूर्व मंत्री लाल सिंह की पत्नी कांता देवी के अवैध कांप्लेक्स बनाने, गुलमर्ग में अवैध निर्माण, उधमपुर में राशन घोटाले, सिकॉप के पूर्व अधिकारियों द्वारा घोटाला करने आदि के केस दर्ज हुए हैं।
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केंद्र शासित प्रदेश बनने से पहले सीबीआई के पास प्रदेश के केस जांच के लिए न के बराबर जाते थे। क्राइम ब्रांच या फिर एंटी करप्शन ब्यूरो के पास ही घोटालों और फ्रॉड के केस जाते थे। लेकिन अब सीबीआई के पास अधिक मामले जा रहे हैं। यहां तक कि हाईकोर्ट भी सीबीआई को मामलों की जांच देने के लिए दिलचस्पी दिखा रहा है।

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एसीबी की जांच से संतुष्ट नहीं लोग

क्राइम ब्रांच और एसीबी की जांच से लोग संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं। इन एजेंसियों के पास मामलों की जांच चल रही थी। बाद में सीबीआई को सौंप दी गई। सबसे बड़ा उदाहरण रोशनी घोटाला है। रोशनी घोटाले की जांच एसीबी के पास थी। हाईकोर्ट ने एसीबी को फटकार लगाते हुए इसकी जांच भी सीबीआई को दी।

शिकायतों और मांग का लंबा ग्राफ
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद सीबीआई के पास कई शिकायतें पहुंच रही हैं। पिछले डेढ़ साल में सीबीआई के पास सौ से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। इसके अलावा कई पार्टियों और दलों ने समय-समय पर विभिन्न मामलों की जांच सीबीबाई से कराने की मांग भी की है।
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