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बाढ़ पीड़ितों को दी जाएगी नकद सहायता राशि

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बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान करने के साथ ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास में पीड़ितों को सरकार की ओर से हर संभव सहायता दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 2005 के उड़ी भूकंप और लद्दाख में बादल फटने के पीड़ितों को जिस तरह सहायता राशि का नकद भुगतान किया गया था उसी तर्ज पर बाढ़ पीड़ितों को भी नकद भुगतान किया जाएगा।
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साथ ही उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं अथवा पूरी तरह तबाह हो गए हैं उनके पुनर्निर्माण में सरकार की भूमिका बहुत ही कम होगी। लोग अपने मकानों का निर्माण खुद करवाएंगे ताकि उन्हें किसी तरह की शिकायत न हो।

उमर ने कहा कि निर्माण कार्य के लिए आवश्यक लकड़ी और सीमेंट सरकारी डिपो से उपलब्ध करवाया जा सकता है और स्टील सेल (स्टील अथारिटी आफ इंडिया) द्वारा मुहैया करवाई जा सकती है।
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जल्द बहाल होगी बिजली सप्लाई

इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने इंश्योरेंस कंपनियों से स्टेट में कैंप लगाने की अपील की ताकि बाढ़ पीड़ितों के मामलों को जल्द निपटाया जा सके। मुख्यमंत्री न केंद्र सरकार से अपील की कि इंश्योरेंस कंपनियों को हिदायत दी जाए कि मुआवजा राशि तय करने के दौरान बाढ़ से हुए नुकसान को भी इसमें शामिल किया जाए।

मुख्यमंत्री ने घाटी में विद्युत सप्लाई पूरी तरह बहाल करने को लेकर कोई भी समय सीमा तय करने से इनकार करते हुए कहा कि बाढ़ के बाद घाटी में सिर्फ 100 मेगावाट सप्लाई ही बाकी रह गई थी। पर अब इसे 480 मेगावाट तक बहाल किया जा चुका है। संबंधित विभाग और अन्य एजेंसियों पूरी तरह जुटीं हुईं हैं ताकि जल्द पूरी घाटी में विद्युत सप्लाई बहाल की जा सके।

सत्तू खाकर मिली जीवित रहने की ताकत

कश्मीर में बाहरी राज्य के बाढ़ प्रभावित दिहाड़ीदारों ने आठ दिन तक सत्तू खाकर और पानी पीकर अपनी जान बचाई है। सुबह जब ये लोग रेलवे स्टेशन उधमपुर पहुंचे तो उनके पास पेट भरने के लिए सत्तू ही थे, जिसे वह पानी में भिगोकर खाते हुए नजर आए। पश्चिम बंगाल के रहने वाले कुछ परिवार जब कश्मीर से जानकर बचाकर रेलवे स्टेशन उधमपुर पहुंचे, तो सबसे पहले इन लोगों ने एक थैले से सत्तू निकाला और उसको चीनी के साथ पानी में भिगोकर पेट भरा।

परिवार के सदस्य मुनीर, मोबुल आदि ने बताया कि उनके घर में हमेशा सत्तू बनाकर तैयार रखा जाता है। जब बाढ़ आई तो सभी ने तैयार किए गए सत्तू का थैला अपने साथ ले लिया। आठ दिन तक उनके लिए पेट भरने का साधन सत्तू ही था। जब भी भूख लगती सभी पानी में सत्तू को भिगोकर खा लेते। इससे शरीर को ताकत मिलती और फिर वे पैदल सफर शुरू कर देते। यदि सत्तू नहीं होता तो उनके लिए उधमपुर तक पहुंचना काफी मुश्किल होता। आठ दिन तक उनको सत्तू ने जीवित रहने की ताकत प्रदान की।
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विशेष ट्रेन से वापस भेजे गए बाढ़ पीड़‌ित

श्रीनगर में आई बाढ़ से बचकर आए उत्तर प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, हिमाचल प्रदेश आदि जगहों के वालों को उधमपुर से विशेष ट्रेन से शुक्रवार को रवाना किया गया। इन ट्रेनों के अलावा जो नियमित तौर पर ट्रेनें उधमपुर से रवाना होती हैं, उनसे भी लोगों को भेजा गया। जो बच गए हैं, उनके लिए रेलवे शनिवार को दोबारा विशेष ट्रेन चलाएगा।

उधमपुर के स्टेशन सुपरिंटेंडेंट के अनुसार यात्रियों का पहले पंजीकरण किया गया, जिस क्षेत्र के अधिक लोग हैं। उन क्षेत्रों की सूची तैयार करके अलग से ट्रेन को रवाना किया गया। पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के  रास्ते इस ट्रेन को दिल्ली तक पहुंचाया गया है। कई यात्रियों को डीएमयू और सेना की गाडि़यों से जम्मू भेजा गया है। जम्मू से भी जो ट्रेनें जा रही है, वहां से भी इन यात्रियों को मुफ्त रवाना किया जा रहा है।

सेना और जिला प्रशासन से भी संपर्क किया जा रहा है। विशेष ट्रेन को देर रात रवाना किया जाएगा। कश्मीर से आने वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है। इनमें से सैकड़ों लोगों को अन्य ट्रेनों से भी भेज दिया गया है। उनकी कोशिश है कि रात को भी यदि कोई पैसेंजर पहुंचे, तो उसे भी ट्रेन से भेजा सके। विशेष ट्रेन स्टेशन पहुंच गई है। इसे आपातकाल में ट्रैक साफ होने के दौरान रवाना किया जाएगा।
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