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जानें, क्यों कश्मीर में पत्थरबाजों पर से वापस होंगे मुकदमें?

Tue, 27 Dec 2016 03:50 PM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र, अमर उजाला/जम्मू
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kashmir - फोटो : PTI
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कश्मीर में विश्वास बहाली के लिए जम्मू कश्मीर सरकार कम उम्र के पत्थरबाजों पर चल रहे मुकदमे वापस लेने की तैयारी कर रही है। गृह विभाग और पुलिस की समीक्षा के बाद यह मुहिम परवान चढ़ी तो कम उम्र के लगभग एक हजार पत्थरबाजों को माफी मिल सकती है।
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हालांकि, यह कवायद अब तक प्रशासनिक स्तर तक ही सीमित है। गठबंधन सरकार के सहयोगी दल भाजपा से इस बाबत सलाह मशविरा नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने निर्दोष और बहकावे में आकर पत्थर मारने वाले बच्चों के मामले में सहानुभूति और नरमी की वकालत करते हुए ऐसे मामलों की समीक्षा के आदेश दिए हैं। 

अलगाववादियों द्वारा सरफेसी एक्ट और वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजियों को पहचान पत्र दिए जाने के मुद्दे को तूल दिए जाने के बाद पीडीपी ने विश्वास बहाली के लिए उदार कदम की जरूरत पर जोर दिया है। अलगाववादी एक बार फिर से अनुच्छेद 370 और कश्मीर की आजादी को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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4500 को मिल चुकी है जमानत

कश्मीर में हिंसा - फोटो : फाइल फोटो
पीडीपी मानती है कि विश्वास बहाली के लिए कदम उठाने से अलगाववादियों को अलग-थलग करना आसान होगा। गृह विभाग के सूत्रों के मुताबिक कश्मीर हिंसा के दौरान उपद्रव फैलाने और उकसाने के आरोप में 5084 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

इनमें से लगभग 4500 लोगों को जमानत मिल चुकी है। हिंसा के दौर में पुलिस ने 2602 मामले दर्ज किए थे। 6681 लोगों को हिंसा और उपद्रव फैलाने के मामले में आरोपी बनाया। इनमें से 1600 लोगों की अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। 
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रियायत देने के पक्ष में नहीं है केंद्र

गृह मंत्रालय रियायत देने के पक्ष में नहीं - फोटो : File Photo
हिंसा की ढाई हजार घटनाओं सुरक्षा बलों के 5000 से अधिक जवान भी घायल हुए। हिंसा, पत्थरबाजी और आगजनी के आरोप में 500 लोगों पर पीएसए लगाया गया है।

इनमें कई कम उम्र के लोग हैं। सिविल सोसाइटी और कश्मीर में निजी हैसियत से दौरे कर रही कईं टीमें पीएसए की भी समीक्षा के लिए दबाव बना रहीं हैं।

उधर, केंद्रीय गृह मंत्रालय अलगाववादियों और उपद्रवियों को कोई रियायत देने के पक्ष में नहीं है। केंद्र की सहमति के बगैर उपद्रवियों को माफी की राह आसान नहीं दिखती है। 
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